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Mahakumbh 2025 का समापन : एकता और आस्था का महायज्ञ संपन्न, PM मोदी बोले- महाकुंभ युग परिवर्तन की आहट

प्रयागराज। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रयागराज में महाशिवरात्रि के साथ संपन्न हुए महाकुंभ 2025 की दिव्यता और भव्यता पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने इस ऐतिहासिक आयोजन को ‘युग परिवर्तन की आहट’ करार दिया और इसे राष्ट्र चेतना को जागृत करने वाला पर्व बताया।

एकता, समरसता और प्रेम का प्रतीक बना तीर्थराज प्रयाग

प्रधानमंत्री मोदी ने महाकुंभ पर अपने विचार को लेखबद्ध करते हुए गुरुवार को कहा, “महाकुंभ संपन्न हुआ… एकता का महायज्ञ संपन्न हुआ। जब एक राष्ट्र की चेतना जागृत होती है, जब वह सैकड़ों वर्षों की गुलामी की मानसिकता के बंधनों को तोड़कर नवचैतन्य के साथ आगे बढ़ता है, तो ऐसा ही दृश्य उपस्थित होता है, जैसा हमने प्रयागराज में देखा।”

उन्होंने 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का जिक्र करते हुए कहा कि उस दिन उन्होंने ‘देवभक्ति से देशभक्ति’ की बात की थी और प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान इस विचार को प्रत्यक्ष रूप से देखा गया। मोदी ने कहा, “इस महाकुंभ में 140 करोड़ भारतीयों की आस्था एक साथ एक पर्व में आकर जुड़ी। तीर्थराज प्रयाग का यह क्षेत्र एकता, समरसता और प्रेम का प्रतीक बन गया।”

दुनिया हैरान है कि कैसे एक नदी तट पर…

प्रधानमंत्री ने इस आयोजन को दुनिया में बेजोड़ बताते हुए कहा कि प्रयागराज में हुआ महाकुंभ आधुनिक युग के ‘मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स’ और ‘पॉलिसी एक्सपर्ट्स’ के लिए अध्ययन का विषय बन गया है। उन्होंने कहा, “पूरी दुनिया हैरान है कि कैसे एक नदी तट पर करोड़ों लोग बिना किसी औपचारिक निमंत्रण के एकत्र हो सकते हैं। यह भारत की सांस्कृतिक शक्ति का परिचायक है।”

युवा पीढ़ी की भागीदारी से बढ़ा विश्वास

महाकुंभ में बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारत की युवा पीढ़ी के संस्कार और संस्कृति के प्रति संकल्पबद्ध होने का प्रमाण है। उन्होंने कहा, “यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि भारत की संस्कृति को मजबूत करने की सदियों पुरानी परंपरा की सशक्त नींव है।”

एक भारत-श्रेष्ठ भारत का प्रतिबिंब

पीएम मोदी ने कहा, “महाकुंभ में हर वर्ग, हर जाति, हर क्षेत्र के लोग एक साथ आए। यह एक भारत-श्रेष्ठ भारत का चिर स्मरणीय दृश्य था, जिसने करोड़ों देशवासियों को आत्मविश्वास से भर दिया।” उन्होंने कहा कि प्रयागराज में जो भव्य आयोजन हुआ, वह भारत की एकता और अखंडता का प्रतीक बन गया।

श्रद्धालुओं की सेवा में समर्पित प्रयागराज

प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश सरकार, प्रशासन, सफाई कर्मियों, पुलिसकर्मियों, नाविकों, वाहन चालकों और प्रयागराज के नागरिकों की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “हर कोई श्रद्धा भाव से भरा सेवक था। प्रयागराज के निवासियों ने 45 दिनों तक श्रद्धालुओं की सेवा करके अतुलनीय योगदान दिया। मैं सभी का आभार व्यक्त करता हूँ।”

 

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग में अर्पित करेंगे प्रार्थना

एकता के महाकुंभ को सफल बनाने में हर नागरिक के योगदान की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “इस आयोजन को सफल बनाने वाले प्रत्येक व्यक्ति का मैं आभार व्यक्त करता हूं। मैं जल्द ही द्वादश ज्योतिर्लिंग में से प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ के दर्शन के लिए जाऊंगा और वहां श्रद्धा रूपी संकल्प पुष्प अर्पित करूंगा। मैं प्रार्थना करूंगा कि एकता की यह अविरल धारा ऐसे ही प्रवाहित होती रहे।”

गंगा-यमुना की स्वच्छता का संकल्प

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर गंगा-यमुना सहित सभी नदियों की स्वच्छता को लेकर देशवासियों को जागरूक होने का संदेश दिया। उन्होंने कहा, गंगा, यमुना और सरस्वती की स्वच्छता हमारी जीवन यात्रा से जुड़ी है। हमें इसे अपनी जिम्मेदारी मानते हुए नदियों की सफाई को सतत अभियान के रूप में अपनाना चाहिए।

महाकुंभ: भविष्य की दिशा तय करने वाला पर्व

मोदी ने कहा, “महाकुंभ सदियों से भारत की राष्ट्रीय चेतना को बल प्रदान करता आया है। यह एक ऐसा पर्व है जिसमें ऋषि-मुनि समाज के वर्तमान और भविष्य पर मंथन करते हैं। अब इस महाकुंभ ने भी हमें भारत की विकास यात्रा के नए अध्याय का संदेश दिया है – यह संदेश है ‘विकसित भारत’ का!”

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