Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

रातापानी के साथ माधव उद्यान को भी टाइगर रिजर्व बनाने का रास्ता साफ

एनटीसीए ने दी अधिसूिचत करने के प्रस्ताव को मंजरी, दो बाघ छोड़े जाएंगे, रातापानी अभयारण्य के लिए फाइल अंतिम चरण में
Follow on Google News
रातापानी के साथ माधव उद्यान को भी टाइगर रिजर्व बनाने का रास्ता साफ

भोपाल। प्रदेश में रातापानी राष्ट्रीय उद्यान के साथ माधव राष्ट्रीय उद्यान को टाइगर रिजर्व बनाया जाएगा। इसके लिए रविवार को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की तकनीकी समिति ने बाघ अभयारण्य के रूप में अधिसूचित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। माधव राष्ट्रीय उद्यान को टाइगर रिजर्व बनाने के लिए पिछले दिनों राज्य वन्यप्राणी बोर्ड के बैठक में सहमति दी गई थी। इसके बाद वन विभाग ने एक प्रस्ताव एनटीसीए की तकनीकी समिति को मंजूरी के लिए भेजा था। एनटीसीए की समिति ने उद्यान में एक नर और एक मादा बाघ को छोड़ने को भी मंजूरी दी है। रातापानी टाइगर रिजर्व के लिए एनटीसीए पहले ही मंजूरी दे चुका है।

यह होगा लाभ : राज्य सरकार द्वारा की गई संरक्षण पहल से माधव राष्ट्रीय उद्यान और कूनो राष्ट्रीय उद्यान में वन्यजीव प्रबंधन को मजबूती मिलेगी और स्थानीय समुदायों को अपेक्षित इको टूरिज्म का लाभ मिलेगा। क्षेत्र का विकास होने के साथ रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी।

माधव राष्ट्रीय उद्यान के बारे में

माधव राष्ट्रीय उद्यान शिवपुरी में है जो 1956 में अस्तित्व में आया। शुरू में इसका क्षेत्रफल 167 वर्ग किलोमीटर था जिसे बढ़ाकर 354 वर्ग किलोमीटर किया गया। यहां वन्यप्राणी चिंकारा, और चीतल की बड़ी संख्या में हैं। नीलगाय, सांभर, चौसिंगा, कृष्णमृग, स्लोथ रीछ, तेंदुए, लंगूर पाए जाते हैं। अब यहां बाघों को बसाया जा रहा है।

कोर एवं बफर क्षेत्र में कोई वन ग्राम शामिल नहीं

इस प्रस्तावित टाइगर रिजर्व के कोर एवं बफर क्षेत्र में कोई वन ग्राम शामिल नहीं है। कोर क्षेत्र के अंतर्गत 15 राजस्व ग्राम सम्मिलित थे जिनमें से 10 राजस्व ग्रामों को पूर्ण रूप से विस्थापित किया जा चुका है। जबकि, पांच राजस्व ग्रामों का आंशिक विस्थापन शेष है।

  • कोर क्षेत्र 375 वर्ग किमी
  • बफर क्षेत्र 1,276 वर्ग किमी
  • पूरा क्षेत्रफल 1,751 वर्ग किमी

शासन से सहमति मिलते ही घोषित होगा टाइगर रिजर्व

टाइगर रिजर्व के लिए गजट नोटिफिकेशन करने के लिए हरी झंडी मिलते ही अब वन्यप्राणी विभाग के माध्यम से शासन को प्रपोजल भेजा जाएगा। फाइल मुख्यमंत्री तक जाएगी और सहमति मिलते ही राज्य शासन द्वारा गजट नोटिफिकेशन के साथ राष्ट्रीय रिजर्व बनाने की घोषणा की जाएगी। -एल. कृष्णमूर्ति, अप्रमुवसं वन्यजीव

People's Reporter
By People's Reporter

Latest Posts