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अनाथ बेटियों ने जिद-जज्बे-जुनून से फहराया अपने हुनर का परचम, प्रदेश और देश में किया नाम

International Women's Day

पुष्पेन्द्र सिंह-भोपाल। आठ साल की बालिका, जिसे इस उम्र में अपने माता-पिता की सबसे ज्यादा जरूरत थी, लेकिन एक दिन पापा का साया उठ गया। कुछ समय बाद मां का सहारा भी नहीं मिला। लिहाजा महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से संस्था में भर्ती करा दिया गया। इसी तरह की एक बेटी रेखा भी थी। आज दोनों बेटियां मप्र और देश का नाम रोशन करते हुए विदेश में अपने हुनर का परचम फहरा रही हैं।

तीन बच्चियों ने बचपन से ही सपना संजोया और उसे पूरा करके दिखाया

ये कहानी है कटनी की रेखा और कंचन की। दोनों को छह और आठ साल की उम्र में लिटिल स्टार फाउंडेशन में परवरिश के लिए भेजा गया। संस्था शासन के अनुदान के बिना संचालित होती है। लोगों के सहयोग से चलती है। एक दिन संस्था में घोड़ा आया है। बस, इस समय तय कर लिया कि उन्हें घुड़सवारी करना है। कंचन ने अपनी इच्छा भी संस्था के सामने प्रकट कर दी। संस्था ने अलग से घुड़सवारी सिखाने वाले ट्रेनर को बुलाया। दोनों बेटियां राइडिंग में रम गईं। कक्षा दसवीं तक आते आते कंचन ने वर्ष 2017 में मप्र खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा आयोजित चयन प्रक्रिया में भाग लिया। कंचन हार्स राइडिंग एकेडमी के लिए चयनित हो गईं। वर्ष 2019 में उसने एथलेटिक्स लीग नेशनल जूनियर में गोल्ड और इसी साल जयपुर के घुड़सवारी चैंपियनशिप में रजत मेडल प्राप्त किया। कंचन वर्तमान में डबलिन आयरलैंड में कोच के पद पर 30 लाख रुपए वार्षिक पैकेज पर कार्यरत हैं, जबकि रेखा जयपुर में रायडिंग की ट्रेनिंग दे रही हैं।

और ये है आंकाक्षा की कहानी…

बाल कल्याण समिति कटनी को वर्ष 2015 में आकांक्षा नाम की बेटी को सौंपा गया था। कक्षा सातवीं तक पढ़ाई करते रहने के दौरान आकांक्षा ने घुड़सवारी में प्रशिक्षण प्राप्त किया और वर्ष 2017 में जयपुर की अकादमी में भेजा गया। उसने भोपाल में जूनियर नेशनल में गोल्ड मेडल हासिल किया। दिल्ली आर्मी पोलो क्लब में दूसरा स्थान पाया।

बेटियों ने अपनी मेहनत से पाया मुकाम

दोनों बेटियों में जज्बा और जुनून देखते बनता था। संस्था में घोड़ा देखते ही अड़ गईं कि उन्हें घुड़सवारी ही सीखना है। आज कंचन आयरलैंड में है तो रेखा जयपुर में। हमारी संस्था में ही विनीता नाम की बेटी आई थी। इसी तरह आकांक्षा ने भी अपनी मेहनत के बल पर हॉर्स राइडिंग में प्रदेश और देश में कई गोल्ड मेडल हासिल किए। -कृष्णा, कार्यकर्ता, लिटिल स्टार फाउंडेशन कटनी

मेहनत से सीखी घुड़सवारी

कंचन ने बताया कि उन्होंने कड़ी मेहनत और जुनून के साथ घुड़सवारी सीखी। आज वह बेसहारा नहीं है। कंचन बताती हैं कि वे इस समय विदेश में घुड़सवारी की ट्रेनिंग दे रही है और ढाई लाख रुपए प्रति माह वेतन मिल रहा है।

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