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एक दिन पहले फिलिस्तीन को सपोर्ट करने के बाद, बांग्लादेशी हिंदुओं के समर्थन वाला बैग लेकर संसद पहुंचीं प्रियंका गांधी

नई दिल्ली। वायनाड से लोकसभा सांसद प्रियंका गांधी ने 16 दिसंबर के ‘बैग’ वाला वाकिया मंगलवार संसद में फिर दोहराया। जहां वो बीते दिन फिलिस्तीन के समर्थन वाला बैग लेकर पहुंची थीं, वहीं आज वो संसद में ऐसा बैग लेकर पहुंचीं, जिस पर बांग्लदेश में हिंदुओं और ईसाइयों के साथ खड़े रहने का पैगाम लिखा था।

बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों पर प्रियंका ने उठाए सवाल

लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान प्रियंका गांधी ने बांग्लादेश में हिंदू और ईसाई अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा, “यह सरकार बांग्लादेश के हिंदू और ईसाई अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ कब आवाज उठाएगी? उन्हें बातचीत कर उनका समर्थन लेना चाहिए।”

प्रियंका ने 1971 के युद्ध और विजय दिवस का भी जिक्र करते हुए कहा, “आज विजय दिवस है। मैं उन वीर जवानों को नमन करती हूं, जिन्होंने 1971 में देश के लिए लड़ाई लड़ी। उस समय इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में नेतृत्व किया और देश को विजय दिलाई।”

फिलिस्तीन समर्थित बैग पर हुए विवाद पर प्रियंका ने जवाब देते हुए कहा, “मैं क्या पहनूंगी, इसे कोई और तय नहीं करेगा। मैं पितृसत्ता को नहीं मानती और वही पहनूंगी जो मुझे ठीक लगेगा।”

‘फिलिस्तीन समर्थन’ पर पाकिस्तान के पूर्व मंत्री की प्रतिक्रिया

प्रियंका गांधी सोमवार को संसद में एक बैग लेकर पहुंचीं थीं, जिस पर “फिलिस्तीन आजाद होगा” लिखा था। इस पर विवाद भी हुआ और पाकिस्तान की इमरान सरकार में पूर्व मंत्री फवाद हसन चौधरी ने उनकी तारीफ की। फवाद ने X पर लिखा, “जवाहरलाल नेहरू की पोती से इससे बेहतर उम्मीद नहीं की जा सकती। प्रियंका ने अपना कद और ऊंचा कर लिया है। यह शर्मनाक है कि हमारे देश के सांसद ऐसा साहस नहीं दिखा पाए।”

बीते महीनों में बढ़े हैं बांग्लादेशी हिंदुओं पर हिंसा

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले अगस्त 2024 से लगातार बढ़ते जा रहे हैं। सेंटर फॉर डेमोक्रेसी, प्लुरलिज्म एंड ह्यूमन राइट्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ 5 से 9 अगस्त के बीच 190 घटनाएं सामने आईं। वहीं, 32 घरों में आगजनी, 16 मंदिरों में तोड़-फोड़ और 2 यौन हिंसा के मामले दर्ज किए गए। 20 अगस्त तक कुल 2010 हिंसा के मामले दर्ज किए गए, जिनमें 157 परिवारों पर हमले और 69 मंदिरों के अपमान की घटनाएं शामिल हैं।

इसके अलावा, 25 नवंबर को बांग्लादेश की यूनुस सरकार ने इस्कॉन संत चिन्मय कृष्ण दास को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया था। इस गिरफ्तारी के बाद चटगांव में हिंसा भड़क गई थी, जिसमें एक वकील की मौत भी हुई थी।

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