
इंदौर। अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित पाम बीच काउंटी में रोज हजारों टन कचरा, सड़े-गले खाद्य पदार्थ, डाइपर्स, पुराने जूते, टायर, प्लास्टिक बैग, बेकार कारपेट एवं बगीचों से निकली घास की कतरनें इन्सिनरेटर में जलाकर उससे बिजली बनाई जा रही है। अब इसी तर्ज पर कचरे से ईंधन बनाने का कार्य इंदौर में शुरू किया जा रहा है। स्वच्छता में छह बार नंबर वन का खिताब हासिल कर चुका शहर अब 7वीं बार यह तमगा हासिल करने में जुट गया है। सर्वेक्षण की टीम सभी जोनों में भ्रमण कर सफाई, विकास कार्यों व नवाचारों का जायजा ले रही है। यहां की सफाई को लेकर देश-विदेश में प्रतिस्पर्धाएं हो रही हैं, लेकिन इसमें इंदौर ही इतिहास रच रहा है। नवाचारों के क्रम में ग्रीन वेस्ट से सीएनजी के बाद अब कोयला और लकड़ी के फ्यूल तैयार किए जाएंगे। स्मार्ट सिटी का यह प्रोजेक्ट प्रदेश में पहला है। इसके टेंडर हो चुके हैं।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगमायुक्त हर्षिका सिंह के निर्देश पर देवगुराड़िया स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड पर कोयला और फ्यूल निर्माण शुरू किया जाना है। शहर में रोजाना 300 टन से अधिक गीला कचरा निकलता है। इसी कचरे से नया प्रयोग किया जाएगा। सीएनजी से निगम की बसें चलाई जाती हैं।
कचरे से बिजली बनाने पर काम होगा : टेंडर इसी सप्ताह खोला जाएगा। अगले माह से फ्यूल बनाए जाएंगे। सभी श्मशान घाटों में कंडे के स्थान पर इन्हें इस्तेमाल किया जाएगा। इसके बाद कचरे से बिजली बनाने की योजना पर काम किया जाएगा।
ऐसे बनेगा लकड़ी का फ्यूल : घरेलू गीले कचरे और पत्तियों के कचरे में कई बार छोटी लकड़ियां निकलती हैं। इसमें पत्तियों को अलग कर लकड़ियों को गन्ने की तरह क्रश किया जाएगा फिर इनके महीन टुकड़ों को गम या फेविकॉल जैसी चीज से जोड़ा जाएगा। इन्हें कंडे की तरह गोलाई में काटकर फ्यूल निर्माण में इस्तेमाल होगा।
लकड़ी का फ्यूल : गीले कचरे से लकड़ी तैयार की जाएगी। लकड़ी को बुरादा बनाकर उससे ब्लॉक बनाया जाएगा। यह ब्लॉक दाह संस्कार में कंडे के स्थान पर इस्तेमाल किए जाएंगे।
कोयले का उपयोग : गीले कचरे से कोयला बनाया जाएगा। यह कोयला सीमेंट व अन्य सामग्री के लिए दिया जाएगा। इसका दाम मेयर इन काउंसिल में तय किया जाएगा।
कोयले और लकड़ी के फ्यूल तैयार करने टेंडर हो चुके हैं। इस तरह का प्रयोग प्रदेश में पहली बार हो रहा है। – महेश शर्मा, अधीक्षण यंत्री, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट
(इनपुट-ललित मोरवाल)