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भोजशाला में जमीन की ‘सोनोग्राफी’ से होगा अब सच्चाई का खुलासा

अयोध्या और काशी में कारगर साबित हुई है जीपीआर तकनीक
भोजशाला में जमीन की ‘सोनोग्राफी’ से होगा अब सच्चाई का खुलासा

राजीव सोनी-भोपाल। धार जिले की विवादित और ऐतिहासिक भोजशाला में हाईकोर्ट के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किए जा रहे सर्वे में अब ग्राउंड पेनीट्रेटिंग रडार (जीपीआर) मशीन की एंट्री भी हो गई। अत्याधुनिक तकनीक की यह मशीन जमीन के भीतर बिना किसी तोड़फोड़ के ‘सोनोग्राफी’ व स्कैनिंग कर सच का खुलासा करने में सक्षम है।

एएसआई ने इस तकनीक का इस्तेमाल अयोध्या में बाबरी और काशी में ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे में भी किया था। जीपीआर की रिपोर्ट ने वहां महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। विशेषज्ञों का दावा है कि जमीन की गहराई में यदि कोई मानव निर्मित स्ट्रक्चर है तो जीपीआर उसका सटीक विवरण दे देता है। भोजशाला में इस तकनीक से काम शुरू हो गया है।

ऐसे होता है जीपीआर सर्वे

जमीन की खुदाई किए बिना 10 से 30 मीटर गहराई तक धातु अथवा अन्य किसी संरचना की सटीक जानकारी ग्राउंड पेनीट्रेटिंग रडार (जीपीआर) तरंगों के माध्यम से दे देता है। विशेषज्ञों के मुताबिक सर्वे में परिसर के अंदर जमीन में दबी वस्तुओं का पता लगाने की यह अचूक तकनीक है।

ऑब्जेक्ट से टकराकर ‘सबूत’ लाएंगी तरंगें

भोजशाला की सच्चाई जानने को लेकर पूरे देश में उत्सुकता बनी हुई है। यहां 22 मार्च से सर्वे की शुरुआत हुई है, जो चार जुलाई तक चलेगा। एएसआई ट्रेसिंग, ब्रशिंग और फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी की मदद से सर्वे कर रही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम हैदराबाद से आए विशेषज्ञों की मदद से दिन भर भू-गर्भ में छिपे तथ्यों को ढूंढने में जुटी रही। भोजशाला के मौजूदा स्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाए बिना जीपीआर ने जमीन में कई मीटर की गहराई तक तरंगे भेजकर वहां मौजूद अवशेषों का आकलन किया। बताया जाता है कि उन्हें खंडित संगमरमर की मूर्ति का ब्योरा मिला। इसके अलावा कुछ और भी जानकारी मिली हैं। जीएसआई के विशेषज्ञों का कहना है कि जीपीआर मशीन ‘जियो फिजिक्स’ के सिद्धांत पर ठीक वैसे ही काम करती है जैसे सोनोग्राफी मशीन। इसकी तरंगे जमीन, पानी और पहाड़ों के भीतर मौजूद ऑब्जेक्ट से टकराकर पूरे ब्योरे के साथ लौटती हैं।

इस तकनीक से मिलता है सटीक विवरण

जीपीआर तकनीक से जमीन के भीतर का काफी सटीक विवरण मिल जाता है। हम लोगों ने 2003 के दौरान अयोध्या में बाबरी ढांचे के नीचे व आसपास उत्खनन के दौरान जीपीआर की मदद से सर्वे किया था। इससे यह जानकारी मिल जाती है कि जमीन की गहराई में मौजूद स्ट्रक्चर का आकार कितना है वह ह्यूमन मेड है या नहीं। अयोध्या के निष्कर्ष को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मान्यता भी दी थी। - केके मुहम्मद, पुरातत्वविद् एवं एएसआई के पूर्व क्षेत्रीय निदेशक

नई तकनीक रहेगी उपयोगी

भोजशाला के गर्भ में क्या छिपा है यह नई तकनीक से ही सामने आएगा। इसका सभी को इंतजार है। सच सामने आने के बाद ही टाइटल बदलेगा और वाग्देवी के आने का रास्ता खुलेगा। - गोपाल शर्मा, हिंदू पक्षकार,धार

People's Reporter
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