स्नैक बाइट के इलाज के लिए अब जरूरी नहीं होगा सांप का फोटो, कोई भी सांप काटे लगेगा यूनिवर्सल एंटी स्नैक वेनम

सभी प्रकार के जहर को रोकने का काम करता है एंटी स्कैन वेनम
Follow on Google News
स्नैक बाइट के इलाज के लिए अब जरूरी नहीं होगा सांप का फोटो, कोई भी सांप काटे लगेगा यूनिवर्सल एंटी स्नैक वेनम

भोपाल। अगर किसी व्यक्ति को सांप ने काट लिया है तो उसे अब इलाज से पहले डॉक्टर को सांप का रंग, आकार या अन्य जानकारी देने की आवश्कता नहीं होगी, क्योंकि अब जेपी और हमीदिया अस्पताल सहित प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में यूनिवर्सल एंटी स्कैन वेनम लगाया जा रहा है। यह वेनम सभी प्रकार के जहर को रोकने का काम करता है। दरअसल, अब तक अस्पतालों में हीमोटॉक्सिक और न्यूरोटॉक्सिक एंटी स्नैक वेनम मिलते थे।

दोनों वेनम अलग-अलग जहर के लिए काम आते हैं। इसलिए डॉक्टर इलाज से पहले मरीज से सांप के बारे में जानकारी मांगते थे, ताकि मरीज को सही एंटी वेनम लगाया जा सके। मालूम हो कि सांप के जहर की पहचान टॉक्सिकोलॉजी लैब में होती है, जो जेपी अस्पताल में लैब नहीं है, वहीं हमीदिया अस्पताल में भी व्यवस्थित लैब की कमी है।

पांच प्रकार के जहर पर होता है असर

विशेषज्ञों के मुताबिक नए यूनिवर्सल एंटी स्नैक वेनम में सांप के पांच तरह के जहर को खत्म करने की क्षमता होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक सांप का जहर हीमोटॉक्सिक और न्यूरोटॉक्सिक सहित पांच तरह का होता हैं। मानव शरीर में जाने के बाद सभी जहर के लक्षण अलग-अलग होते हैं। सांप काटने की दवा का निर्माण भी सांप के जहर से ही होता है।

[embed]https://www.youtube.com/watch?v=Jc1eWO3-Kf8[/embed]

यह होते हैं जहर के प्रकार

  • न्यूट्रोक्सिन: यह सबसे प्रमुख जहर होता है। यह शरीर में प्रतिरक्षण प्रणाली को खत्म कर देता है जिससे मृत्यु हो सकती है।
  • हेमोटॉक्सिन: यह जहर रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जिससे रक्तस्राव, अंगों का नुकसान और यहां तक कि मृत्यु हो सकती है।
  • न्यूरोटॉक्सिन: यह जहर तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी, पक्षाघात और यहां तक कि मृत्यु हो सकती है।
  • साइटोटॉक्सिक : यह जहर ऊतकों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे सूजन, दर्द और यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है।

बारिश में हर दिन आते हैं एक दर्जन मामले:

सीएमएचओ प्रभाकर तिवारी के मुताबिक बारिश के सीजन में स्नैक बाइट के मामले बढ़ जाते हैं। शहर में हर दिन 8 से 10 मामले अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में सभी अस्पतालों में एंटी स्नैक वेनम के पर्याप्त डोज रखने के निर्देश दिए गए है।

एम्स में सॉफ्टवेयर से होती है जांच

एम्स में टॉक्सिकोलॉजी लैब सॉफ्टवेयर पर काम करती है। । सॉफ्टवेयर में करीब साढे तीन लाख तरह के जहर के लक्षणों को फीड किया गया है।

स्नैक वेनम का उपयोग

अस्पताल में यूनिवर्सल एंटी स्नैक वेनम उपयोग हो रहा है। अस्पताल में 100 वॉयल मौजूद हैं। -डॉ, राकेश श्रीवास्तव, अधीक्षक, जेपी अस्पाल

People's Reporter
By People's Reporter

Latest Posts