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अब बारिश के बाद हो सकते हैं प्राथमिक सहकारी समितियों में चुनाव

2018 से ड्यू चुनाव कराने हाईकोर्ट ने 2023 में दिए थे निर्देश, फिर लोकसभा चुनाव आ गए थे
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अब बारिश के बाद हो सकते हैं प्राथमिक सहकारी समितियों में चुनाव

भोपाल। बारिश के बाद प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स), जिला सहकारी केंद्रीय बैंक और फिर राज्य सहकारी बैंक के चुनाव हो सकते हैं। सहकारिता मध्य प्रदेश राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकारी एमबी ओझा ने चुनाव कराने के लिए कार्यक्रम जारी किए थे, लेकिन लोकसभा चुनाव से ये चुनाव टल गए थे। प्रदेश में 4,531 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां हैं। इनमें अध्यक्ष और सदस्यों के चुनाव किसानों के जरिए किए जाते हैं। इन समितियों में चुनाव वर्ष 2013 में हुए थे। इसके बाद वर्ष 2018 से चुनाव ड्यू हैं।

चुनाव में 3 से 4 माह का लगेगा वक्त

समितियों के चुनाव कराने में तीन से चार माह का समय लगेगा। पहले समितियों में सदस्यता सूची तैयार होगी। इसके बाद दावे आपत्तियां सुनी जाएगी। इसके बाद सदस्यों का चुनाव होगा। सदस्य समिति अध्यक्षों का चुनाव करेंगे। समितियों के अध्यक्ष और सदस्य बैंक के अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। जिला सहकारी बैंकों के अध्यक्ष अपेक्स बैंक का अध्यक्ष चुनेंगे।

चुनाव नहीं होने से ये परेशानी

चुनाव नहीं होने से समितियों और बैंकों के नीतिगत निर्णय नहीं हो पाते हैं। किसानों की बातें सरकार सीधे नहीं पहुंच पाती हैं। वहीं किसानों से जुड़ी तमाम तरह की समस्याओं के निराकरण में तमाम तरह की दिक्कतें होती हैं। समितियों के विस्तार और कारोबार में भी त्वारित निर्णय नहीं हो पाते हैं। प्रशासक समितियों को कम समय देते हैं। वे पहले अपने मूल काम को देखते हैं ।

जानिए कब क्या हुआ

  • 2013 में चुनाव हुए, पांच वर्ष के लिए संचालक मंडल ने काम किया।
  • 2018 में चुनाव होना था।
  • विधानसभा चुनाव के चलते चुनाव टल गए।
  • 2019 में लोकसभा चुनाव आ गया। आचार संहिता से फिर पैक्स चुनाव टल गए।
  • कांगेस सरकार चुनाव की तैयारी करा रही थी, सरकार गिर गई।
  • 2020 में कोरोना आ गया, इसके बाद निकाय चुनाव शुरू हो गए।
  • 2023 में चुनाव को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर हुई।
  • कोर्ट ने दिसम्बर 2023 में सरकार को चुनाव कराने के निर्देश दिए।
  • इसके बाद लोकसभा चुनाव आ गया।

किसानों की परेशानीसदस्य और अध्यक्ष होने से किसानों को खाद-बीज और फसल ऋण पर्याप्त नहीं मिलने की समस्याएं सरकार तक सीधे पहुंचाया जा सकता है। -समिति प्रबंधक भी नहीं सुनते हैं। करण सिंह, किसान, सीहोर

समिति अध्यक्ष और सदस्य किसानों को खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था करते हैं। सदस्य नहीं होने से समिति प्रबंधक बात नहीं सुनते हैं। -प्रहलाद लोधी,किसान, नरसिंहगढ़

People's Reporter
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