
योगेश सोनी-जबलपुर। डिजिटल क्रांति के दौर में मप्र उच्च न्यायालय पेपरलेस होने की दिशा में अग्रसर है। अब यहां की अदालतों में मुकदमों की सुनवाई फाइलों के बजाए स्क्रीन देखकर की जाती है। जज आसंदी के सामने लगी स्क्रीन पर मुकदमे की जानकारी देखते हैं, वहीं दोनों पक्षों के वकीलों के लिए भी बोर्ड पर स्क्रीन लगी रहती है। अदालतों में अब अधिकांश वकील फाइलों के बजाए आई को देखकर जिरह करते हैं।
हाईकोर्ट को पेपरलेस बनाने के लिए पहला कदम तत्कालीन चीफ जस्टिस एएम खानविलकर ने उठाया था। इसके बाद कोर्ट में कागज के इस्तेमाल को कम करने और डिजिटल क्रांति का लाभ पक्षकारों तक पहुंचाने के उद्देश्य से हाईकोर्ट के डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया शुरू हुई। अब किसी भी मुकदमे की पूरी जानकारी हाईकोर्ट वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन के बाद एक क्लिक मेें मिल जाती है।
देश में अव्वल स्थान मिला
सूचना के अधिकार के तहत जानकारी देने के मामले में मप्र उच्च न्यायालय देश में अव्वल स्थान पर है। आरटीआई के तहत प्राप्त की जाने वाली जानकारी का न सिर्फ आवेदन, बल्कि शुल्क भी ऑनलाइन ही जमा होने के बाद ऑनलाइन मोड से ही जानकारी प्रदान की जाती है।
ई-फाइलिंग में चौथे स्थान पर: ई-फाइलिंग के मामले में मप्र उच्च न्यायालय देश में चौथे स्थान पर है। दिल्ली, मुम्बई और पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में ई-फाइलिंग की सुविधा पहले शुरू हुई थी।