
भोपाल। पौराणिक कथाओं में अक्सर एक अदृश्य आवाज लोगों को उनके साथ भविष्य में घटने वाली घटनाओं की जानकारी देकर सचेत करती थी। यह अदृश्य आवाज ‘भविष्यवाणी’ कहलाती है। सोचिए, अगर यही भविष्यवाणी फिर होने लगे और हमारे भविष्य की जानकारी देने लगे तो कैसा रहेगा? आपको जानकर हैरानी होगी कि शहर के हमीदिया अस्पताल में ऐसी मशीने इंस्टॉल की जा रही हैं जो लोगों को भविष्य में होने वाली बीमारियों के आरे में भविष्यवाणी करेंगी। । बस इसके लिए आपको उस मशीन के चंद सवालों के जवाब देना होगा। यह संभव होगा आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस यानि एआई तकनीक से।
दरअसल, हमीदिया अस्पताल में एआई बेस्ड ऐसे कियोस्क लगाए जाएंगे जो लोगों को सेहत से जुड़ी जानकारी देंगे। कियोस्क बताएंगे कि भविष्य में व्यक्ति को कौन-कौन सी बीमारियों की आशंका ज्यादा है। यही नहीं वो इन बीमारियों से बचने के रास्ते यानि विकल्प भी बाएगा। चिकित्सा शिक्षा विभाग और कार्किनोस हेल्थकेयर द्वारा ऐसे कियोस्क पर काम किया जा रहा है जो मरीजों को उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी देगा। जानकारी के मुताबिक इस साल तक इस साल के अंत तक यह कियोस्क हमीदिया अस्पताल के साथ इंदौर मेडिकल कॉलेज में लगाए जाएंगे।
सॉफ्टवेयर करेगा मरीजों से सवाल
जानकारी के मुताबिक कियोस्क को एआई बेस्ड सॉफ्टवेयर से तैयार किया जाएगा। इस सॉफ्टवेयर में कैंसर, मधुमेह, मेंटल हैल्थ, हार्ट समेत अन्य बीमारियों के डेटा, उनके लक्षण, केस हिस्ट्री के साथ अन्य सैंकड़ों जानकारियां स्टोर होती है। इसी जानकारियों के साथ एक प्रश्नावलि भी सॉफ्टवेयर में इंस्टॉल रहती है। चैटबॉक्स के माध्यम से मरीजों से कुछ सवाल किए जाएंगे। एआई इन सवालों के जवाब और फीड डेटा का मिलान कर मरीज की सेहत के बारे में जानकारी देगा। साथ ही स्वस्थ रहने के तरीके भी बताएगा।
पहले चरण की शुरूआत पांच विभागों से
वेल्नेस कियोस्क को भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज और इंदौर के माहत्मा गांधी मेडिकल कॉलेज से संबंधित अस्पतालों के पांच विभागों में संचालित किया जाएगा। इसमें आॅन्कोलॉजी, सर्जरी, मेडिसिन, स्त्री रोग और ईएनटी विभाग शामिल है। यहां यदि सफल परिणाम सामने आते हैं तो इसे अस्पताल के अन्य विभागों में संचालित किया जाएगा। इसके बाद अगले चरण में प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इस व्यवस्था को शुरू किया जाएगा।
शुरूआत में ही पकड़ में आएगी बीमारी
इस प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि जरूरी नहीं कि यह कियोस्क जो कहे वह सौ फीसदी सही निकले। लेकिन इससे बीमारियों को शुरुआती स्टेज में पहचानने में मदद मिलेगी। कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियों को बढ़ने से पहले ही रोक लेने या उसे पहचानने में मदद मिलेगी।
हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक ने क्या कहा
हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आशीष गोहिया के मुताबिक, एआइ बेस्ड सॉफ्टवेयर से मरीजों का रिस्क एस्समेंट टेस्ट करने की तैयारी चल रही है। विभाग से इसको लेकर जानकारी मिली है। बीमारी से बचने में यदी यह मदद करता है तो यह एक अच्छी पहल साबित होगी। इस डिवाइस में जिसमें टच स्क्रीन डिवाइस, कंप्यूटर समेत अन्य डिवाइसें हो सकती हैं।
(इनपुट – प्रवीण श्रीवास्तव)