
भोपाल। ऐसा बिल्कुल नहीं लग रहा कि सरकारी की मंशा बड़ी झील को संरक्षित करने की है। आपने जो जवाब पेश किया है, वह नहीं प्रॉपर है। निर्माण के लिए न तो संबंधित एजेंसियों से कोई परमिशन ली गई और न ही भोजवेट लैंड अथॉरिटी के किसी भी लेटर का नगर निगम और एमपी टूरिज्म काउंसिल ने जवाब दिया। जबकि एमपीटी सीधे तौर पर मामले में पार्टी है। जवाब में कोई भी कागज लगा दिए हैं, चाहे वह मामले से संबंधित हों या न हों। आपका जवाब ‘यूजलेस’ है। यह बात नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने मंगलवार को हुई पेशी के दौरान अधिकारियों को फटकारते हुए कही।
बता दें कि रामसर साइट भोज वेट लैंड बड़ी झील किनारे बोट क्लब के पास जीवन वाटिका पार्क की 10 हजार वर्ग फीट नम भूमि पर टूरिज्म कौंसिल एक निजी कंपनी की मदद से क्रूज रेस्टोरेंट का निर्माण कर रहा है। जहां ये निर्माण किया जा रहा है वह झील का वेटलैंड एरिया है। इस निर्माण के लिए न वेटलैंड अथॉरिटी से अनुमति ली गई न ही राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल से एनओसी ली गई है। नगर निगम झील संरक्षण प्रकोष्ठ ने भी कोई अनुनति जारी नहीं की। निर्माण छिपाने के लिए टीन लगाकर यहां कई पिलर्स खड़े किए जा चुके हैं। इस मामले में एन्वायरमेंट एक्टीविस्ट राशिदनूर खान ने 27 सितंबर 2022 को एनजीटी में याचिका दायर की थी। मामले में अब तक लगभग सात पेशियां हो चुकी हैं। इससे पहले एनजीटी ने मामले की जांच के लिए पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और एप्को अधिकारियों की चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर 40 दिन में रिपोर्ट पेश करने को कहा था। समिति ने 9 दिसंबर 2022 को रिपोर्ट पेश कर दी थी। इधर, राज्य सरकार से जवाव तलब किया था, जो 21 मार्च को हुई हुई सुनवाई में पेश किया गया। जवाब से संतुष्ट न होने पर एनजीटी ने अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। साथ ही कहा कि झील के एफटीएल में निर्माण के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई है। साथ ही संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि अनुमति जारी न की जाए।
एनजीटी में पेश की गई रिपोर्ट
इधर, फ्लोटिंग रेस्टोरेंट निर्माण को एनजीटी द्वारा गठित जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में अवैध बता चुकी है। 9 दिसंबर को एनजीटी में पेश रिपोर्ट में साफतौर पर कहा गया है कि जहां ये निर्माण किया जा रहा है, वह झील का वेटलैंड एरिया है। निर्माण के लिए न तो वेटलैंड अथॉरिटी से अनुमति ली गई और न ही राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल से एनओसी ली गई। नगर निगम के झील संरक्षण प्रकोष्ठ ने भी अनुमति जारी नहीं की। निर्माण छिपाने के लिए टीन लगाकर यहां कई पिलर्स खड़े किए जा चुके हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि एफटीएल से 50 मीटर अंदर 19 हजार वर्ग फीट एरिया में निर्माण किया जा रहा है। यहां 22 कॉलम बनाए जाने के साथ ही निर्माण स्थल को शेड से कवर किया गया है। निर्माण के लिए जरूरी एजेंसियों से अनुमति लेनी चाहिए थी।
निगम की रिपोर्ट
जब नगर निगम झील संरक्षण प्रकोष्ठ के अधिकारियों ने बड़ी झील किनारे म्यूजिकल फाउंटेन के पास मौक मुआना किया तो उन्हें यहां किसी तरह का अवैध निर्माण नजर नहीं आया। यह भी देखना जरूरी नहीं समझा कि झील संरक्षण से अनुमति जारी हुई है या नहीं। जबकि, बिना अनुमति किए जा रहे निर्माण को रोकने की सबसे पहली जिम्मेदारी झील संरक्षण प्रकोष्ठ की है।