
गणेश चतुर्थी का महापर्व भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है। मान्यता है कि गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी को मध्याह्न काल में स्वाति नक्षत्र एवं सिंह लग्न में हुआ था, यही वजह है कि इस चतुर्थी को मुख्य गणेश चतुर्थी या विनायक चतुर्थी कहते हैं। यह कलंक चतुर्थी के नाम से भी प्रसिद्ध है।
चतुर्थी को गणपति की स्थापना की जाती है और अगले दस दिन यानी अनंत चतुर्दशी तक गणेश पूजन किया जाता है। इसके बाद अनंत चतुर्दशी को गणपति जी का विसर्जन किया जाता है। मान्यता है कि गणेश जी की पूजा से घर परिवार में सुख शांति और समृद्धि आती है। इस साल गणेश चतुर्थी के अवसर पर शुभ योग और एक विशेष संयोग बन रहा है। जो कि 10 साल बाद गणेश चतुर्थी पर बना हैं।
गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त
- गणेश चतुर्थी की तिथि आरंभ: 30 अगस्त, दोपहर 03:34 मिनट।
- गणेश चतुर्थी की तिथि समाप्त: 31 अगस्त, दोपहर 03:23 मिनट।
- गणपति स्थापना का मुहूर्त: 31 अगस्त को सुबह 11:05 से दोपहर 01:38 तक रहेगा।
- गणेश चतुर्थी व्रत : 31 अगस्त 2022
गणेश चतुर्थी पर 10 साल बाद बन रहा विशेष संयोग
शास्त्रों के मुताबिक, गणेशजी का जन्म भाद्र शुक्ल चतुर्थी के दिन दोपहर के समय हुआ था। जिस दिन गणेशजी का जन्म हुआ था उस दिन बुधवार था। अबकी बार भी कुछ ऐसा संयोग बना है कि भाद्र शुक्ल चतुर्थी तिथि दोपहर के समय बुधवार को रहेगी। ऐसा संयोग इसलिए बना है क्योंकि चतुर्थी तिथि मंगलवार 30 अगस्त को दिन में 3 बजकर 34 मिनट से लग जा रही है और अगले दिन यानी 31 अगस्त को दिन में 3 बजकर 23 मिनट तक रहेगी।
31 अगस्त को उदया कालीन चतुर्थी तिथि और मध्याह्न व्यापिनी चतुर्थी तिथि होने से इसी दिन विनायक चतुर्थी का व्रत पूजन सर्वमान्य होगा। धार्मिक दृष्टि से यह बहुत ही शुभ संयोग है। इस शुभ संयोग में गणेशजी की पूजा अर्चना करना भक्तों के लिए बेहद कल्याणकारी होगा।
गणेश चतुर्थी पर रहेगा रवियोग
गणेश चतुर्थी 31 अगस्त के दिन अबकी बार रवियोग भी उपस्थित रहेगा, जैसा कि 10 साल पहले भी था। गणेशजी का आगमन तो यूं भी सभी विघ्नों को दूर करता है उस पर रवियोग का भी होना और भी शुभ है क्योंकि रवियोग को भी अशुभ योगों के प्रभाव को नष्ट करने वाला माना गया है।
गणेश चतुर्थी पर ग्रह गोचर का योग
इस बार गणेश चतुर्थी के दिन दोपहर तक चंद्रमा बुध की राशि कन्या में होंगे। शुक्र इसी दिन राशि बदलकर सिंह में आएंगे और सूर्य के साथ मिलेंगे। यानी इसी दिन शुक्र संक्रांति होगी। गुरु अपनी राशि मीन में होंगे। शनि अपनी राशि मकर में। सूर्य अपनी राशि सिंह में। बुध अपनी राशि कन्या में होंगे। यानी इस दिन चार ग्रह अपनी राशि में होंगे। ग्रह नक्षत्रों का यह संयोग भी भक्तों के लिए शुभ फलदायी रहेगा।
गणेश चतुर्थी का कार्यक्रम
इस साल गणेश चतुर्थी 31 अगस्त को है। इस दिन गणपति को विराजमान किया जाएगा। 09 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर गणेश जी की मूर्ति विसर्जित की जाएगी। इन 10 दिनों तक जोर-शोर के साथ गणेश उत्सव मनाया जाएगा। भगवान गणेश के भक्त 10 दिन तक उनकी पूजा-उपासना करेंगे। इस अवधि में कई खास कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। आखिर में अनंत चतुर्दशी के दिन ‘गणपति बप्पा मोरिया’ के जयकारों के साथ गणेश विसर्जन करेंगे।
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इस तरह करें गणपति स्थापना
गणेश चतुर्थी के दिन स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें। पीले वस्त्र पर चावल का स्वास्तिक बनाकर उस पर भगवान श्रीगणेश जी की प्रतिमा को स्थापित करें। फिर भगवान गणेश जी को विशेष रूप से अक्षत, फूल और हरी दुर्वा चढ़ाएं एवं घी का दीपक जलाएं। मोदक, पंच मेवा, पांच फलों का भोग लगाएं। नारियल, तांबुल व कमल गट्टे, सुपारी व लौंग इलायची आदि चढ़ाएं। गणेश जी की आरती और मंत्रों का जाप करें।
(नोट: यहां दी गई सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। हम मान्यता और जानकारी की पुष्टि नहीं करते हैं।)
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