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Indore News : जालसाजी का हिस्सेदार पुलिस गिरफ्त में, केमको कंपनी से की थी धोखाधड़ी

इंदौर। करीब चार साल पुराने एक मामले में आखिरकार आखिरी और पांचवे आरोपी राजेंद्र प्रसाद गुप्ता को लसूड़िया पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पूर्व में केमको प्यु फूड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से 7.50 लाख के गबन का केस दर्ज करने वाली लसूड़िया पुलिस ने करीब डेढ़ माह पहले जब चौथे आरोपी को गिरफ्तार किया था, तब गुप्ता का नाम सामने आया था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि असल खेल 81 लाख रुपए का है। मामले में पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों से चपत लगाने की धारा बढ़ाते हुए गुप्ता को गिरफ्तार करने के बाद जेल भिजवा दिया है।

पूछताछ में हुआ खुलासा

टीआई संतोष दूधी के अनुसार, 2019 में एस के कम्पाउंड देवास नाका की केमको प्यु फूड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के मैनेजर राम राजपूत की रिपोर्ट पर शुभम वर्मा, संजय पाल और अमित केवट पर केस दर्ज कर तीनों को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया था। मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कंपनी के ही एक अन्य कैशियर दीपक गुर्जर का नाम सामने आया। करीब 45 दिन पहले दीपक गुर्जर को गिरफ्तार कर तीन दिनों को रिमांड पर लिया था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि सांवेर रोड पर तनवीर ट्रेडर्स के नाम से काम करने वाला राजेंद्र प्रसाद गुप्ता केमको कंपनी में रॉ मटेरियल सप्लाई करता था।

दीपक गुर्जर ने गुप्ता के साथ मिलकर केमको कंपनी को 81 लाख रुपए की चपत लगाई थी। गुप्ता ने दीपक से सांठगांठ करके फर्जी रसीदें बनाकर पूरे खेल को अंजाम दिया। गुप्ता जितना माल भेजता नहीं था। उससे ज्यादा का बिल बनाकर देता था, जिसे दीपक पास करते हुए बिल का भुगतान करवा देता था। गुप्ता को कल सिल्वर स्प्रिंग के पास बायपास से गिरफ्तार किया था। उसे एक दिन के रिमांड पर लेने के बाद आज कोर्ट पेश किया गया, जहां से उसे कोर्ट के आदेश पर जिला जेल भिजवा दिया गया।

ऐसे अंजाम देते थे धोखाधड़ी के खेल को

जुलाई 2019 में लसूड़िया पुलिस ने 406 और 408 भादवि का केस (अपराध क्रमांक 916/19) केमको कंपनी के कैशियर शुभम पिता घनश्याम वर्मा निवासी श्याम नगर, कंपनी के ही संजय पिता दुर्गा प्रसाद पाल निवासी भागीरथपुरा और अमित केवट निवासी कुशवाह नगर पर दर्ज किया था। कैशियर शुभम वर्मा कंपनी में काम करने वाले मजदूरों के दो-दो कार्ड बनाकर एक कार्ड का भुगतान मजदूरों को करता था और दूसरे कार्ड का भुगतान खुद रख लेता था। इसके लिए वह मजदूरों के फर्जी कार्ड बनाए और वेतन देने के वाउचर पर फर्जी हस्ताक्षर करता था। इसका खुलासा तब हुआ जब कंपनी द्वारा मजदूरों के वेतन वाउचर की जांच कराई गई। वहीं, कंपनी प्लास्टिक के टैटू और जो खिलौने खरीदती थी।

उक्त खरीदे गए सामानों की जांच की गई तो कंपनी में उक्त सामान सप्लाई करने वाले संजय पाल और अमित केवट ने फर्जी बिल बनाकर शुभम को दिए। शुभम ने इसका भुगतान दोनों को किया। इस तरह सालभर में ही करीब 7.50 लाख रुपए की ठगी तीनों ने मिलकर की। बताते हैं पुलिस की जांच में एक अन्य कैशियर दीपक गुर्जर की भी कारगुजारी सामने आई थी।

पुलिस ने बढ़ाई धारा

पुलिस ने उसे आरोपी बनाकर मामले में 406, 408 के बाद 420, 467, 468, 471, 201 और 120 बी धारा बढ़ा दी थी। सूत्रों के अनुसार, कंपनी मालिक विजय जैसवानी मामले में शुरू से ही कंपनी को माल सप्लाई करने वाले राजेंद्र प्रसाद गुप्ता का नाम ले रहे थे, लेकिन उसकी गिरफ्तारी नहीं हो रही थी। उन्होंने एडिशनल डीसीपी राजेश व्यास से मुलाकात कर केस को गंभीरता से लेने को कहा तब कहीं जाकर लसूड़िया पुलिस ने राजेंद्र प्रसाद गुप्ता को आरोपी बनाते हुए कल गिरफ्तार किया। गुप्ता एक गाड़ी माल भेजता था और तीन गाड़ी की रसीद बनाकर इसका बिल क्लीयर करा लेता था। पुलिस ने बिल भी जब्त किए हैं।

(इनपुट- हेमंत नागले)

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