
अशोक गौतम-भोपाल। पर्यावरण को बचाने के लिए लोक निर्माण विभाग पुरानी सड़कों को खोद कर उससे निकाली गई गिट्टी को रीयूज करेगा। इस मटेरियल में केमिकल और सीमेंट के घोल से कांक्रीट की नई रोड बनाई जाएगी। इस तकनीक से करीब 25 से 30 फीसदी सस्ती सड़क बनाई जा सकेंगी। इसकी लाइफ सीमेंट की मौजूदा तकनीक से बनने वाली सड़क से ज्यादा बताई जा रही है। लोक निर्माण विभाग इस तरह की सड़क भोपाल सहित 5 जिलों में करीब 75 किलोमीटर बनाने की तैयारी कर रहा है।
विभाग पुरानी सड़कों को जब नए सिरे से बनाता है तो उसकी खुदाई मटेरियल को सड़कों के किनारे अथवा कहीं मैदान में डंप कर देता है। इससे बारिश में छोटी- छोटी गिट्टी और रेत बहकर जमा हो जाती हैं। इसके अलावा इसकी गिट्टी और मिट्टी नदियों में भी बहकर जाती है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। नई तकनीक से अब ऐसा नहीं होगा।
सीहोर-श्यामपुर रोड के बेहतर आए परिणाम
प्रदेश में एमपी रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन ने इस तकनीक से सीहोर-श्यामपुर सड़क बनाई है। यह सड़क पहले डामरीकरण युक्त थी। रॉ मटेरियल से इसे टू लेन सीमेंट रोड बनाया गया है। इसमें करीब 30% कम लागत लगी है। जहां 7 मीटर चौड़ी सड़क के निर्माण में प्रति किमी दो करोड़ रुपए लागत आती थी, वहीं इस तरह की सड़क बनाने पर सवा करोड़ रुपए प्रति किमी लागत आती है।
ये सड़कें बनेंगी
जिला मार्ग का नाम दूरी
भोपाल 11 मील से बंगरसिया 6 किमी
दतिया दतिया से उन्नाव 18 किमी
भिंड ग्वालियर-इटावा मार्ग से कनादर 25 किमी
गुना मारुति शोरूम से टोल टैक्स बायपास 7 किमी
खंडवा पंधाना दीवाल से झिरन्या 18 किमी
पुराने मटेरियल से सड़क निर्माण एक अच्छा प्रयोग है। ऐसे प्रयोग नगर निगमों को भी अपनी सड़कों के निर्माण में करना चाहिए। – प्रभाकांत काटरे, रिटायर्ड ईएनसी
प्रदेश में कुछ सड़कों के क्रस्ट (डामर की सड़क को खोदकर उससे निकाली गई गिट्टी) मटेरियल से सीमेंटेड सड़क बनाई जाएगी। यह पर्यावरण के लिए भी अच्छा रहेगा और इससे सड़क निर्माण की लागत भी 25 से 30 प्रतिशत कम आती है। – आरके मेहरा, ईएनसी, लोक निर्माण विभाग, मप्र