इंदौर में 1 लाख 11 हजार के नोटों से हुआ माता का अनोखा श्रृंगार, बंद हुए 2 हजार के नोट भी दिखे दरबार में, देखें VIDEO

इंदौर। नवरात्रि में जहां माता के दरबार में अलग-अलग श्रृंगार और उनकी पूजा-अर्चना के तरीकों से भक्त उन्हें प्रसन्न करते दिखाई दे रहे हैं। वहीं इंदौर के एक माता मंदिर में 1 लाख 11 हजार के अलग-अलग नोटों से माता के मंदिर को सजाया गया। यहां 20, 50, 100, 200 और 500 के करेंसी नोट के साथ ही 2000 के दो नोट भी हैं, जिन्हें आरबीआई ने चलन से बाहर कर दिया है।
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अन्य करेंसी नोट के साथ 2000 के दो नोट भी लगाए।[/caption]
मातारानी के पीछे 50, 100, 200, 500 और 2000 के नोटों से बनाया चक्र।[/caption]
माता की आरती करते हुए भक्तगण।[/caption]
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विजय नगर स्थित देवी मंदिर।[/caption]
(इनपुट - हेमंत नागले)
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अन्य करेंसी नोट के साथ 2000 के दो नोट भी लगाए।[/caption]
माता को अर्पित कर दी रकम
इंदौर के विजय नगर स्थित इस देवी मंदिर में जिसने भी नोटों से सजी मां का रूप देखा वह चकित रह गया। मंदिर के पुजारी के अनुसार, मातारानी के एक भक्त ने राशि माता के श्रृंगार के लिए दी है। सबसे खास बात ये है कि इस पूरी राशि को उन्होंने मंदिर को ही दान कर दिया। हालांकि इस भक्त ने मंदिर समिति को ये साफ कह दिया है कि उसका नाम गोपनीय रखा जाए। 2000 के बंद हो चुके नोटों के बारे में जानकारी दी गई है कि उस भक्त ने जानबूझकर 2000 के नोट बंद होने से पहले बैंक में जमा नहीं किए ताकि वह माता के श्रृंगार के लिए इन्हें दे सके। देखें वीडियो... [caption id="attachment_91954" align="aligncenter" width="600"]
मातारानी के पीछे 50, 100, 200, 500 और 2000 के नोटों से बनाया चक्र।[/caption]
12 घंटे लगे मंदिर सजाने में
सबसे खास बात यह है कि 20 के नए नोटों से गर्भगृह को सजाया गया। वहीं मूर्ति स्थल की सजावट 100 और 200 और 500 के नोटों से की गई। माता की प्रतिमा के शीर्ष पर 200 के दो नोट लगाए गए। इस मंदिर में हुई सजावट का वीडियो पूरे इंदौर में वायरल हो गया। इसके बाद से भारी संख्या में भक्त इस मंदिर को देखने पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं को यह अनोखा श्रृंगार काफी भा रहा है। इस अनोखे ढंग से मंदिर को संवारने में 12 घंटे से ज्यादा का समय लगा। [caption id="attachment_91955" align="aligncenter" width="600"]
माता की आरती करते हुए भक्तगण।[/caption]
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विजय नगर स्थित देवी मंदिर।[/caption]
(इनपुट - हेमंत नागले)
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