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ग्रामीणों ने अधिकारियों को बनाया बंधक : 5 घंटे तक आदिवासियों से घिरे रहे NVDA और फॉरेस्ट के अफसर, जानें फिर क्या हुआ

सिवनी मालवा। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में अधिकारियों को बंधक बनाने का मामला सामने आया है। डूब क्षेत्र का सर्वे करने पहुंचे नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) के अधिकारियों और वन विभाग के लोगों को डैम का विरोध कर रहे आदिवासी ग्रामीणों ने बंधक बना लिया। सभी अधिकारी अपनी गाड़ी में लगभग 5 घंटे तक बैठे रहे। जिसके बाद मौके पहुंचे एसडीओपी ने लोगों को समझाइश देकर उन्हें मुक्त कराया।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, सिवनी मालवा से 35 किमी दूर महुआढाना और मोरघाट के बीच साकलीडोह में डेम का निर्माण प्रस्तावित है। मोरन-गंजाल नदी पर बनने वाले डैम के लिए विभागीय अधिकारी जंगल में पेड़ों की गिनती (रिकाउंटिंग) करने गए थे। इस दौरान उन्होंने फोटो खींचे और वीडियो भी बनाए। इसकी जानकारी मिलते ही गांव के लोगों ने विरोध शुरू कर दिया और अधिकारियों को रोक लिया।

परेशान अधिकारी गाड़ी में ही बैठे रहे। मोबाइल नेटवर्क नहीं होने की वजह से सीनियर अधिकारियों तक सूचना भी नहीं पहुंच पा रही थी। विभाग के कुछ लोग जैसे-तैसे सिवनी मालवा पहुंचे और अधिकारियों को पूरी बात बताई। पूरे मामले की सूचना मिलते ही फोर्स के साथ तहसीलदार राकेश खजूरिया और SDOP राजू रजक मौके पर पहुंचे।

ग्रामीणों को क्यों आया गुस्सा

अधिकारियों ने ग्रामीणों से बात की और उन्हें समझाया। ग्रामीणों ने बताया कि ये अधिकारी उन्हें बिना बताए जंगल में घुस आए थे और फोटो-वीडियो बना रहे थे। उन्होंने ग्राम पंचायत को भी इसकी जानकारी नहीं दी, जिसके चलते हमने उनका रास्ता रोककर उन्हें बंधक बना लिया।

मौके पर पहुंचे एसडीओपी राजू रजक ने ग्रामीणों को समझाया कि हम भी आप लोगों के बीच के हैं। अब से अधिकारी ग्रामीणों को विश्वास में लिए बिना डैम से संबंधित किसी भी तरह का काम नहीं करेंगे। इसके बाद ग्रामीणों ने बंधक बनाए गए अधिकारियों को वाहन समेत जाने दिया।

डैम का विरोध कर रहे ग्रामीण

ग्रामीणों का कहना है कि यहां डैम बनेगा तो उनकी जमीन, घर समेत सब छिन जाएगा। उनके पुनर्वास के लिए भी शासन द्वारा कोई ठोस इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं।

डैम के लिए कटेंगे लाखों पेड़

अनुमान के मुताबिक, परियोजना के लिए बैतूल, हरदा और होशंगाबाद जिले में ढाई लाख से ज्यादा पेड़ काटे जाएंगे। वन अफसरों ने आशंका जताई है कि, यह संख्या चार लाख तक पहुंच सकती है। नर्मदा की सहायक नदियों (मोरन और गंजाल) पर 2325 हेक्टेयर में प्रस्तावित इस परियोजना से होशंगाबाद, बैतूल और हरदा जिले में 1.55 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होगी। वन विभाग ने परियोजना पर काम शुरू कर दिया है।

डैम के निर्माण के लिए होशंगाबाद की 1200 हेक्टेयर, हरदा की 900 हेक्टेयर और बैतूल की 225 हेक्टेयर वनभूमि आ रही है। इसके बदले विभाग ने राज्य सरकार से राजस्व भूमि मांगी है। लेकिन संबंधित जिलों के कलेक्टरों द्वारा वन भूमि के चयन में देरी के कारण यह काम चार महीने से अटका हुआ है। डैम के निर्माण से बैतूल की 225 हेक्टेयर वनभूमि प्रभावित होगी, जिसमें अधिकांश भाग घने जंगल से ढका हुआ है।

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