
नागपुर। महाराष्ट्र के नागपुर में हुई हिंसा के मुख्य आरोपी फहीम खान के घर पर सोमवार को नगर निगम द्वारा बुलडोजर चलाया गया। इससे पहले, प्रशासन ने उसे 24 घंटे के भीतर अवैध निर्माण हटाने का नोटिस दिया था। फहीम खान इस समय पुलिस हिरासत में है और उसके खिलाफ देशद्रोह समेत कई गंभीर आरोप दर्ज हैं। इस कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि दंगाइयों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
फहीम खान के घर पर चला बुलडोजर
फहीम खान के नागपुर के संजय बाग कॉलोनी, यशोधरा नगर स्थित दो मंजिला मकान को नगर निगम ने अवैध निर्माण करार दिया था। 20 मार्च को नगर निगम ने घर का निरीक्षण किया और पाया कि यह बिना किसी वैध भवन योजना के बनाया गया था। 21 मार्च को फहीम को 24 घंटे में निर्माण हटाने का नोटिस दिया गया, लेकिन ऐसा नहीं होने पर सोमवार सुबह बुलडोजर चला दिया गया।
कैसे भड़की थी नागपुर हिंसा?
नागपुर में हिंसा की शुरुआत 17 मार्च को हुई जब विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने औरंगजेब की कब्र हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान कथित रूप से हरे रंग की चादर जलाई गई, जिससे दूसरे पक्ष में आक्रोश फैल गया और मामला हिंसा में बदल गया। देखते ही देखते शहर के कई इलाकों में आगजनी, तोड़फोड़ और पथराव होने लगा।
फहीम खान के खिलाफ देशद्रोह का केस दर्ज
माइनॉरिटी डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) के नागपुर शहर अध्यक्ष फहीम खान को हिंसा का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार, फहीम ने 500 से अधिक लोगों को भड़काकर दंगे करवाए। इसके अलावा, उसने अपने भाषणों के जरिए समुदाय विशेष को उकसाया। पुलिस ने उसे 19 मार्च को गिरफ्तार किया और उसके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया।
फडणवीस सरकार की कड़ी चेतावनी
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि, हिंसा के नुकसान की भरपाई दंगाइयों की संपत्ति बेचकर की जाएगी और जरूरत पड़ी तो बुलडोजर भी चलेगा। विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि यह न तो इंटेलिजेंस फेल्योर था और न ही राजनीतिक साजिश।
नागपुर से कर्फ्यू हटाया गया
हिंसा के छह दिन बाद 23 मार्च को नागपुर से पूरी तरह से कर्फ्यू हटा लिया गया। हालांकि, संवेदनशील इलाकों में पुलिस की गश्त जारी रहेगी। इससे पहले 20 और 22 मार्च को भी कुछ क्षेत्रों से कर्फ्यू हटाया गया था।
112 लोग गिरफ्तार, 33 पुलिसकर्मी घायल
नागपुर हिंसा के दौरान पुलिस उपायुक्त स्तर के तीन अधिकारियों समेत 33 पुलिसकर्मी घायल हुए। अब तक इस हिंसा से जुड़े 112 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
औरंगजेब की कब्र को लेकर बढ़ता विवाद
इस पूरे विवाद की जड़ औरंगजेब की कब्र है, जिसे हटाने की मांग उठी थी। भाजपा सांसद उदयनराजे भोंसले और तेलंगाना के भाजपा विधायक टी. राजा सिंह ने कब्र को गिराने की मांग की थी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस मांग का समर्थन किया था।
अबू आजमी का विवादित बयान
महाराष्ट्र के समाजवादी पार्टी विधायक अबू आजमी ने कहा था कि, औरंगजेब क्रूर शासक नहीं था और उसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। उनके इस बयान के बाद विवाद भड़क गया और विधानसभा से उन्हें पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया।
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