
पुष्पेन्द्र सिंह-भोपाल। मध्यप्रदेश कॉडर के आईएएस फैज अहमद किदवई दिल्ली में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव हैं। उनके ताऊ रफी अहमद किदवई ने देश को आजाद कराने में अमिट योगदान दिया। किदवई बताते हैं कि ताऊ की राजनीतिक यात्रा 1920 में खिलाफत आंदोलन और असहयोग आंदोलन में शामिल होने के साथ शुरू हुई, जिसके बाद उन्हें जेल जाना पड़ा।
मूलत: उत्तरप्रदेश के रहने वाले उनके ताऊ जेल जाने के पहले अपने गांव मसौली में बहुत ही कठिन अभ्यास करते थे इसलिए कि जेल में अंग्रेजों की यातनाएं सहन कर सकें। वे बताते हैं कि एक बार बरेली की जेल में उन्हें भेजा गया। अंग्रेज जेलर बहुत ही निर्दयी था। जेलर जब ताऊ की ओर बढ़ा तो उन्होंने जेलर की छड़ी छीन ली और तोड़ डाली। इसके बाद जेलर आगे नहीं बढ़ा। कश्मीर आंदोलन में उनका योगदान रहा।
कश्मीर आंदोलन में योगदान
फैज अहमद बताते हैं कि उनके ताऊ का कश्मीर आंदोलन में प्रमुख योगदान रहा। फैज अहमद किदवई बताते हैं उन्होंने पिछले दिनों अपने ताऊ के निजी पेपर संग्रह भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार को सौंपे हैं। जिसमें पं. नेहरू के साथ किदवई के मूल पत्राचार शामिल थे। उनके राजनीतिक कौशल ने उन्हें पंडित गोविंद बल्लभ पंत के मंत्रिमंडल में मंत्री बनने के लिए प्रेरित किया स्वतंत्रता के बाद, उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के मंत्रिमंडल में भारत के पहले संचार मंत्री के रूप में कार्य किया।