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इंदौर : हेड कॉन्स्टेबल को डिजिटल अरेस्ट करने की कोशिश, कहा- तुम्हारी बेटी ड्रग मामले में थी, फोन पर रोने की आवाज भी सुनाई

इंदौर। देश भर में सराकार और प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद डिजिटल अरेस्ट जैसी घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रहीं। साइबर ठगों ने लोगों को ठगने का नया तरीका खोज लिया है। इन जालसाजों का निशाना अब केवल आम नागरिक ही नहीं बल्कि पुलिस अधिकारी भी बन रहे हैं। ये ठग किसी के परिवार के सदस्य का नाम लेकर उन्हें डराते और पैसे वसूलते हैं। इसे “डिजिटल अरेस्ट” का नाम दिया गया है। हाल ही में इंदौर में ऐसी ही एक घटना सामने आई।

कैसे करते हैं ठग वारदात

इंदौर के परदेशीपुरा थाने में तैनात हेड कांस्टेबल जीतू सरदार को एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉलर ने कहा कि उनकी बेटी ड्रग्स के मामले में पकड़ी गई है। कॉल पर रोने की आवाज और पुलिस सायरन की आवाज सुनाकर माहौल असली बनाया गया।

ठग ने कहा कि मीडिया वाले बाहर खड़े हैं और केस को सुलझाने के लिए तुरंत 80 हजार रुपए खाते में डालने होंगे। जब कांस्टेबल ने सवाल-जवाब करना शुरू किया, तो ठग ने बात काट दी।

ऐसा ही मामला इंदौर के थाना प्रभारी पंकज द्विवेदी और क्राइम एडिशन डीसीपी के साथ भी हुआ। हालांकि, असली पुलिसकर्मियों ने ठगों को पहचान लिया और इनके जाल में नहीं फंसे।

डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई शब्द नहीं

पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट और हाउस अरेस्ट जैसा कोई शब्द नहीं होता। इसमें केवल सामने वाला व्यक्ति आपको डराता धमकता है और जो डर जाता है, वह वारदात का शिकार हो जाता है। उन्होंने साफतौर पर कहा कि किसी भी जांच एजेंसी द्वारा आपको कोई कॉल आता है और वह डराता या धमकाता है तो मानिए कि आपके साथ पूरी तरह से धोखाधड़ी हो रही है और इसके लिए आपको जागरूक होने की जरूरत है।

पुलिस कमिश्नर ने कहा कि पिछले दिनों इसकी रोकथाम के लिए पुलिस ने कई एडवाइजरी भी जारी की थी और उनके नए-नए तरीके जो सामने आ रहे हैं। उसके लिए भी जांच कर कार्रवाई की गई है, जिसमें पंजाब, बिहार, राजस्थान, झारखंड और दक्षिण राज्यों के कुछ शहर और यूपी से जुड़े हुए कनेक्शन सामने आए थे।

पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि अगर ऐसा कोई कॉल आए,

  1. शांत रहें और पूरी जानकारी जांचें।
  2. किसी अनजान खाते में पैसे न डालें।
  3. तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दें।

(इनपुट- सादिक हुसैन अब्बासी)

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