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Dhar Bhojshala ASI Survey Report : हाईकोर्ट में 2000 पेज की रिपोर्ट पेश, हिंदू पक्ष का दावा- 94 से ज्यादा खंडित मूर्तियां मिलीं

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने सोमवार को विवादित भोजशाला – कमाल मौला मस्जिद परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की अपनी रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ को सौंप दी। एएसआई के अधिवक्ता हिमांशु जोशी ने 2,000 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट उच्च न्यायालय के पंजीयक को सौंपी। जोशी ने मीडिया को बताया कि मैंने रिपोर्ट सौंप दी है। कोर्ट इस मामले पर 22 जुलाई को सुनवाई करेगा। 4 जुलाई को हाईकोर्ट ने एएसआई को आदेश दिया था कि वह विवादित 11वीं सदी के स्मारक के परिसर में लगभग तीन महीने तक किए सर्वेक्षण की पूरी रिपोर्ट 15 जुलाई तक पेश करे। इस स्मारक को लेकर हिंदुओं और मुसलमानों के बीच विवाद है।

हिंदू पक्ष का दावा- 94 से ज्यादा खंडित मूर्तियां मिलीं

भोजशाला की सर्वे रिपोर्ट हिंदू पक्ष के दावे को 100 फीसदी सही साबित कर रही है। यहां 94 आर्टिकल्स मिले, इनमें खंडित मूर्तियां, शिलालेख और संस्कृत के श्लोक हैं। इससे प्रतीत होता है कि यहां मां वाग्देवी का मंदिर था और धार्मिक शिक्षा दी जाती थी। इनमें अलग-अलग समय के करीब 30 सिक्के भी शामिल हैं। – हरिशंकर जैन, हिंदू पक्ष के वकील

हाईकोर्ट के आदेश पर हुआ था सर्वे

भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष 11वीं सदी के इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित है। ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ नामक संगठन की अर्जी पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 11 मार्च को एएसआई को भोजशाला – कमाल मौला मस्जिद परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था। इसके बाद एएसआई ने 22 मार्च से इस विवादित परिसर का सर्वेक्षण शुरू किया था जो हाल ही में खत्म हुआ।

यह है भोजशाला से जुड़ा विवाद

भोजशाला का नाम राजा भोज के नाम पर है। धार के जिला प्रशासन की वेबसाइट पर भी यह जानकारी दी जाती है। इस स्थान को पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यूनिवर्सिटी माना जाता है, जिसमें वाग्देवी (सरस्वती) की प्रतिमा स्थित थी। हालांकि विवाद इस बात को लेकर हैं कि हिंदू पक्ष कहता है कि इसे मुस्लिम शासक ने मस्जिद में परिवर्तित कर दिया था। मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यह मुस्लिम धर्म स्थल है और वहां सालों से इबादत की जा रही है। हालांकि फिलहाल वाग्देवी की प्रतिमा लंदन के एक म्यूजियम में है।

भोजशाला का इतिहास

हिंदू पक्ष का कहना है कि यह सरस्वती मंदिर है। सदियों पहले मुसलमानों ने यहां मौलाना जलालुद्दीन की मजार बनाई थी। भोजशाला में आज भी देवी-देवताओं के चित्र और संस्कृत में श्लोक लिखे हुए हैं। अंग्रेज भोजशाला में लगी वाग्देवी की प्रतिमा को लंदन लेगए थे। याचिका में भी यही कहा गया है कि भोजशाला हिंदुओं का उपासना स्थल है और नमाज के नाम पर भीतर के अवशेष मिटाए जा रहे हैं।

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