
नई दिल्ली। बच्चे के बर्थ सर्टिफिकेट को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक नया मॉडल तैयार किया है, जिसके मुताबिक अब बच्चे के जन्म के रजिस्ट्रेशन के वक्त माता और पिता दोनों के धर्म को अलग-अलग दर्ज किया जाएगा। यानी बच्चे के बर्थ सर्टिफिकेट पर माता-पिता दोनों का धर्म लिखा होगा। इन नियमों को लागू करने से पहले राज्य सरकारों द्वारा अपनाना और अधिसूचित करना होगा। भारत में चली आ रही वर्तमान प्रथा में केवल बच्चे के परिवार यानी पिता का धर्म ही दर्ज किया जाता था। हालांकि राज्यों ने अभी तक नए नियम अधिसूचित नहीं किए हैं।
बच्चे को गोद लेने पर भी यही नियम लागू
प्रस्तावित ‘फॉर्म नंबर 1-जन्म रिपोर्ट’ में बच्चे के ‘धर्म के लिए’ टिक मार्क चयन की आवश्यकता वाले कॉलम का विस्तार किया जाएगा, जिसमें अब ‘पिता का धर्म’ और ‘मां का धर्म’ भी बताया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए नियमों के अनुसार, अब बच्चे के जन्म का पंजीकरण करते समय बच्चे के पिता और मां दोनों के धर्म की जानकारी देनी आवश्यक हो जाएगी। ये नियम बच्चे को गोद लेने के मामले में भी लागू होगा, जिसमें बच्चे को गोद लेने वाले माता-पिता दोनों के धर्म का उल्लेख करना जरूरी होगा।
चीफ रजिस्ट्रार को दिए गए अधिकार
बर्थ एंड डेथ (अमेंडमेंट) एक्ट, 2023 के तहत रजिस्टर जनरल ऑफ इंडिया (आरजीआई) के तहत जन्म और मृत्यु का डेटा राष्ट्रीय स्तर पर मेंटेन करना जरूरी होगा। चीफ रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार के लिए भी अनिवार्य होगा कि वह ये डेटा शेयर करें। आरजीआई को राज्य सरकारों द्वारा नियुक्त चीफ रजिस्ट्रार की गतिविधियों के समन्वय और एकीकरण के लिए कदम उठाने के अधिकार दिए गए हैं। डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र का इस्तेमाल स्कूलों में प्रवेश से लेकर अन्य सेवाओं में भी होगा।
यह है खास
- पिछले साल 11 अगस्त को संसद द्वारा पारित जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम, 2023 के मुताबिक, जन्म और मृत्यु डेटाबेस को राष्ट्रीय स्तर पर बनाए रखा जाएगा।
- इसका इस्तेमाल राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर), मतदाता सूची, आधार संख्या, राशन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, संपत्ति पंजीकरण जैसे अन्य डेटाबेस के लिए किया जा सकता है।
- पिछले साल 1 अक्टूबर से नया नियम लागू हो चुका है। अब जन्म और मृत्यु से जुड़ा पूरा डेटा सरकारी पोर्टल सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (crsorgi.gov.in) पर डिजिटली मौजूद भी रहेगा।
कहां होगा इस्तेमाल?
- इस प्रणाली के तहत जारी डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र शैक्षणिक संस्थानों में एडमिशन लेने सहित अलग-अलग सेवाओं के लिए जन्म तिथि साबित करने के लिए एक दस्तावेज बन जाएगा।
- नए मसौदा के मुताबिक किसी भी जन्म रजिस्टर में दो भाग शामिल होते हैं, कानूनी जानकारी और सांख्यिकीय जानकारी। माता-पिता के धर्म की जानकारी सांख्यिकीय जानकारी के लिए रखी जानी है।
- कानूनी जानकारी से संबंधित जन्म रजिस्टर फॉर्म का विस्तार आधार संख्या और माता-पिता दोनों के मोबाइल और ई-मेल आईडी अगर हैं, तो उन्हें भी रिकॉर्ड करने के लिए कहा गया है।
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