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भोपाल में 5 हजार से अधिक आचार्यों ने गीता पाठ कर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, CM डॉ. मोहन यादव को सौंपा सर्टिफिकेट

भोपाल। ‘गीता जयंती’ के मौके पर बुधवार को राजधानी भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में राज्य स्तरीय कार्यक्रम में पहली बार 5 हजार से अधिक आचार्यों द्वारा गीता के तृतीय अध्याय ‘कर्म योग’ का सस्वर पाठ कर वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कर लिया है। मध्य प्रदेश में गीता जयंती के पावन पर्व के अवसर पर ‘गीता पाठ का गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ बना लिया है।

गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के एजुकेटर विश्वनाथ ने वर्ल्ड रिकार्ड की घोषणा की, जिसके बाद सीएम डॉ. मोहन यादव को गिनीज ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड का सर्टिफिकेट सौंपा गया। बता दें पर्यटन केंद्रों पर श्रीमद्भगवद्गीता रखे जाने की भी घोषणा की गई हैं।

सीएम बोले – भोपाल में आज ‘स्वर्ग के समान द्दश्य’

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार इस सस्वर गीता पाठ ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। आचार्यों की सामूहिक साधना को‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में स्थान मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस उपलब्धि का सर्टिफिकेट प्राप्त कर सभी को बधाई व शुभकामनाएं दीं।

समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. यादव ने कहा कि राजा भोज की नगरी भोपाल में आज ‘स्वर्ग के समान द्दश्य’ है। यह आयोजन हमारी संस्कृति और धर्म की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के सबसे ज्यादा लोग श्रीमछ्वगवद्गीता को पढ़ना चाहते हैं। गूगल के सर्च इंजन के माध्यम से दुनिया में जिस पुस्तक की सबसे ज्यादा चर्चा होती है, वो गीता ही है। लोग गीता सार समझना चाहते हैं। जिन्होंने परमाणु बम बनाए, वो भी मानसिक तौर पर परेशान होकर अंतत: गीता की शरण में आए।

होटलों में रखी जाएगी प्रति

दरअसल, राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान श्रीमदभगवद पुराण और गौ एवं गोपाल चित्र प्रदर्शनी का संयोजन किया। साथ ही साधो बैंड मुंबई के द्वारा भक्तिमय गीतों की सुरमई प्रस्तुति दी गई। विशेष रूप से मध्यप्रदेश में आ रहे पर्यटकों और आगंतुकों को गीता की महिमा से अवगत कराने के लिए प्रदेश के होटलों में श्रीमछ्वगवद्गीता, वाल्मीकि रामायण और रामचरित मानस की एक-एक प्रति रखने की पहल भी की जाएगी।

मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन गीता जयंती का पर्व मनाया जाता है। इस तिथि पर मोक्षदा एकादशी व्रत भी किया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा 5 हजार वर्ष पहले कौरव-पांडवों के युद्ध के बीच अर्जुन को कर्मवाद की शिक्षा प्रदान करने से धर्मग्रंथ ‘गीता’ की रचना हुई।

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