
भोपाल। देश में आपातकाल (1975) के दौरान जेल की यातनाएं सहने वाले लोकतंत्र सेनानियों (मीसा बंदियों) और उनके परिजनों तक सरकार द्वारा घोषित सुविधाएं नहीं पहुंच पा रहीं। सेनानी की मौत पर राजकीय सम्मान और अंत्येष्टि के लिए बढ़ाई गई राशि जैसे कैबिनेट के फैसलों पर क्रियान्वयन नहीं हुआ। राजकीय सम्मान के नाम पर भी केवल खानापूर्ति हो रही है। ग्वालियर-चंबल और मालवांचल से भी ऐसी शिकायतें मिली हैं।
हाल ही में दतिया में दिवंगत हुए लोकतंत्र सेनानी कंठमणि बुधौलिया सहित कुछ अन्य मामलों में प्रशासन की लापरवाही उजागर हुई है। लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व सांसद कैलाश सोनी ने आपत्ति दर्ज कराई है। कैबिनेट ने अगस्त में जो निर्णय लिए थे उनकी अधिसूचना 9 सितंबर 2024 को राजपत्र में प्रकाशित हो गई। इसमें अंत्येष्टि की राशि बढ़ाई गई है।
नियम में ये हुआ संशोधन
सेनानी के दिवंगत होने पर राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि और परिवार को 8 के बजाए 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया गया है। प्रकाशन तिथि से ही नियम लागू है लेकिन जिलों में पालन नहीं हो पा रहा।
ये हैं हालात: मोबाइल की फ्लैश लाइट में सेनानी की अंत्येष्टि
पिछले पखवाड़े दतिया में मीसाबंदी कंठमणि बुधौलिया के निधन पर प्रशासन की अनदेखी सामने आ गई। देर शाम रोशनी न होने से मोबाइल की फ्लैश लाइट के बीच अंतिम संस्कार किया गया। दिवंगत सेनानी की पत्नी के खाते में 10 हजार के बजाए 8 हजार रुपए ही भेजे गए।
प्रशासनिक फेल्योर पर कलेक्टर ने खेद जताया
दिवंगत सेनानी के पुत्र अमिताभ ने सत्ता-संगठन के सामने प्रशासनिक फेल्योर का खुलासा कर दिया। इस पर दतिया कलेक्टर संदीप माकिन ने खेद प्रकट करते हुए सफाई दी कि ”मैं शहर से बाहर था। आपको एडीएम से कोआर्डिनेट करने का अनुरोध किया था। आपका मन दुखा, हम क्षमाप्रार्थी हैं। ”
EXPLAINER
- मप्र में 1600 मीसाबंदी हैं।
- देश में 30 हजार लोकतंत्र सेनानी हैं।
3 माह पूर्व हुईं थीं ये घोषणाएं
- सेनानियों का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान से होगा।
- अंत्येष्टि राशि 8 हजार से 10 हजार बढ़ाई।
- मीसाबंदियों के संघर्ष को पाठ्यपुस्तकों में शामिल करेंगे।
- एयर एंबुलेंस और एयर टैक्सी के किराए में छूट।
- लोकतंत्र सेनानियों को ताम्र पत्र दिए जाएंगे।
- परिजनों को उद्योग लगाने में मदद करेगी सरकार।
अधिसूचना के बाद भी फैसलों का भली-भांति पालन नहीं
राजपत्र में अधिसूचना के बाद निर्णय लागू हो जाना चाहिए। लेकिन लगता है स्पष्ट दिशा निर्देशों के अभाव में गफलत हो रही है। सरकार ने जिस शिद्दत से फैसले लिए हैं उनका भलीभांति पालन नहीं हो पा रहा।
– कैलाश सोनी, राष्ट्रीय अध्यक्ष लोकतंत्र सेनानी संघ
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