
इम्फाल। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने रविवार शाम को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपते हुए मणिपुर की जनता की सेवा को अपने जीवन का सम्मान बताया। राज्य में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा के कारण उन पर भारी दबाव था, जिससे सरकार की स्थिरता पर लगातार सवाल उठ रहे थे।
बीरेन सिंह ने इस्तीफे में क्या कहा
मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देते हुए एन बीरेन सिंह ने कुछ महत्वपूर्ण बिंदु सामने रखे;
- मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि यह राज्य हजारों वर्षों के समृद्ध इतिहास का हिस्सा रहा है।
- सीमा पर घुसपैठ को रोकने और अवैध प्रवासियों को देश से बाहर करने की सख्त नीति बनाई जानी चाहिए।
- नशे और नशे के आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को जारी रखना होगा।
- बायोमेट्रिक जांच और सख्त निगरानी के साथ एमएफआर (MFR) की नई और सुरक्षित व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
- सीमा पर तेजी से और समयबद्ध तरीके से सुरक्षा कार्यों को जारी रखना होगा।
हिंसा और बढ़ते दबाव के चलते इस्तीफा
मणिपुर में पिछले साल तीन मई से जातीय हिंसा जारी है, जिसमें अब तक 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हो चुके हैं। हाल ही में जिरीबाम में तीन महिलाओं और उनके बच्चों की हत्या के बाद हिंसा और भड़क गई थी। इसके चलते एन बीरेन सिंह पर जबरदस्त राजनीतिक दबाव बढ़ गया था।
एनडीए की सहयोगी पार्टी एनपीपी (नेशनल पीपुल्स पार्टी) ने भी सरकार से समर्थन वापस ले लिया और नेतृत्व परिवर्तन की मांग की, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
कैसे शुरू हुई हिंसा
मणिपुर में हिंसा की शुरुआत मैतेई और कुकी समुदायों के बीच तनाव से हुई। तीन मई 2023 को मणिपुर हाईकोर्ट ने सरकार को यह निर्देश दिया कि वह मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने पर विचार करे। इस फैसले के विरोध में आदिवासी छात्रों के संगठन (ATSUM) ने एक रैली निकाली, जिसके बाद हिंसा भड़क उठी और पूरा राज्य जातीय संघर्ष में उलझ गया।
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