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मणिपुर में छात्रों का हिंसक प्रदर्शन जारी, 2 जिलों में कर्फ्यू, 15 सितंबर तक इंटरनेट बैन, राज्य के सभी कॉलेज बंद

इम्फाल। मणिपुर में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन छात्रों का हिंसक प्रदर्शन जारी रहा। राजभवन की ओर मार्च कर रहे छात्रों की सुरक्षाबलों से झड़प हो गई। छात्रों ने सुरक्षाबलों पर पत्थर फेंके और गुलेल से छर्रों से भी हमला किया। इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागकर भीड़ को तितर-बितर किया।

ड्रोन हमले का कर रहे विरोध

छात्र 1 और 3 सितंबर को मैतेई इलाकों में हुए ड्रोन हमलों का विरोध कर रहे हैं। वे राज्य के 60 में से 50 मैतेई विधायकों से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही, उन्होंने DGP और सुरक्षा सलाहकार को हटाने की भी मांग की है। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे प्रदर्शन जारी रखेंगे। 9 सितंबर को भी छात्रों ने राजभवन पर पत्थरबाजी की थी। जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले और रबर बुलेट्स दागे थे।

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छात्रों का नेतृत्व कर रहे एम. सनाथोई चानू ने मांग की है कि राज्य की यूनिफाइड कमांड की कमान मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को सौंपी जाए और केंद्रीय बलों की मौजूदगी कम की जाए। उन्होंने कहा कि जब तक राज्य सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा।

मणिपुर के दो जिलों में कर्फ्यू

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने इंफाल ईस्ट और इंफाल वेस्ट जिलों में कर्फ्यू लगा दिया है। इसके अलावा, राज्य में 15 सितंबर शाम 3 बजे तक इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं, ताकि हिंसक घटनाओं को फैलने से रोका जा सके और स्थिति को काबू किया जा सके।

केंद्र सरकार ने CRPF के 2000 जवान भेजे

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, हिंसा को देखते हुए केंद्र सरकार ने मणिपुर में 2000 और CRPF जवान भेजने का फैसला किया है। ये जवान तेलंगाना और झारखंड से भेजे जा रहे हैं। इनकी तैनाती चुराचांदपुर और इंफाल के आसपास की जाएगी। पहले से ही राज्य में 16 CRPF बटालियन तैनात हैं, जो विभिन्न जिलों में काम कर रही हैं। केंद्र ने इन जवानों को एंटी ड्रोन गन से लैस किया है ताकि ड्रोन हमलों को रोका जा सके।

एक साल से जारी है हिंसा

मणिपुर में पिछले साल 3 मई (करीब एक साल) से हिंसा जारी है। मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में आयोजित ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के बाद जातीय हिंसा भड़की थी। इसकी वजह से मणिपुर में 180 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। 65 हजार से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ चुके हैं। मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इंफाल घाटी में रहते हैं। वहीं आदिवासी, जिनमें नागा और कुकी शामिल हैं, वे 40 प्रतिशत हैं और मुख्य रूप से पहाड़ी जिलों में रहते हैं।

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