
मुंबई। महाराष्ट्र कैबिनेट ने आज मराठाओं को 10% आरक्षण देने के बिल के मसौदे को मंजूरी दे दी है। सरकार के प्रस्ताव में मराठा समुदाय के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरी में 10 फीसदी आरक्षण की सिफारिश की गई है। इससे राज्य में मराठाओं के रिजर्वेशन की सीमा 50 प्रतिशत से ऊपर हो जाएगी। इसके बाद भी मराठा आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल का कहना है कि, सरकार हमें मूर्ख न बनाए, अगर बिल पास नहीं हुआ तो फिर से आंदोलन होगा। इसी के साथ मुस्लिमों के लिए भी आरक्षण की मांग उठने लगी है।
मराठा कोटा के लिए तीसरी बार पेश हुआ कानून
मराठा आरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार ने विशेष सत्र बुलाया था। इसमें उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी पहुंचे। मसौदे में सरकार ने उन पॉइंट्स को हटा दिया है, जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण को खारिज कर दिया था। इस विशेष सत्र में मराठों को 50 प्रतिशत से ऊपर आरक्षण देने वाले विधेयक को मंजूरी मिली। यह तीसरी बार हुआ जब राज्य ने मराठा कोटा के लिए कानून पेश किया। बता दें कि, सरकार का मकसद अन्य समुदायों के लाभों को प्रभावित किए बिना मराठा समुदाय को स्थायी आरक्षण प्रदान करने का है।
अब आगे क्या होगा ?
अब यह बिल विधान परिषद और फिर विधानसभा में पेश किया जाएगा। बता दें कि, मराठा आरक्षण पर राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (SEBC) की रिपोर्ट दोपहर 1 बजे विधानमंडल के पटल पर रखी गई।
बिल पास नहीं हुआ तो दोबारा आंदोलन करेंगे : मनोज जरांगे
मुद्दे पर मराठा आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल का कहना है कि, मसौदे में मराठाओं की मांग को पूरा नहीं किया गया। आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत के ऊपर जाएगी और सुप्रीम कोर्ट इसे तुरंत रद्द कर देगा। हमें ऐसा आरक्षण चाहिए जो ओबीसी कोटे से हो और 50 प्रतिशत के नीचे रहे।
जरांगे ने आगे कहा- सरकार हमें मूर्ख बना रही है। हम भी सरकार से कहना चाहते हैं कि अगर ओबीसी कोटे से मराठाओं को आरक्षण नहीं मिला तो हमारा आंदोलन और तेज होगा। विधानमंडल के विशेष सत्र में हमारी मांगों पर विचार हो रहा है या नहीं, हम देखेंगे।
मुस्लिम समुदाय ने भी उठाई आवाज
सपा विधायक रईस शेख ने मुस्लिम समुदाय की तरफ से आरक्षण को लेकर आवाज उठाते हुए कहा, मुस्लिम समुदाय के पिछड़ेपन को खत्म करने और उनके साथ न्याय करने के लिए उन्हें भी जल्द 5% आरक्षण दिया जाए।
डिप्टी सीएम अजित पवार को याद दिलाया वादा
इसके साथ ही रईस शेख ने डिप्टी सीएम अजित पवार से इस मामले में हस्तक्षेप करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा मैं डिप्टी सीएम से अपील करता हूं, वह इस मुद्दे पर ध्यान दें और राज्य के मुस्लिम समुदाय को न्याय दिलाएं। उन्होंने वादा किया था कि अल्पसंख्यकों के साथ कोई अन्याय नहीं किया जाएगा।
महाराष्ट्र पिछड़ा वर्ग आयोग ने सौंपी मराठा सर्वे रिपोर्ट
महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (OBC) ने शुक्रवार यानी 16 फरवरी को मराठा समुदाय ने सर्वे रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपी थी। इस रिपोर्ट में 2.5 करोड़ परिवारों का जिक्र किया गया था।
क्या है सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग
मराठा समुदाय के नेता मनोज जरांगे ने मांग बताते हुए कहा कि, सरकार मराठाओं को कुनबी जाति का प्रमाण पत्र जारी करे। असल में कुनबी जाति के लोगों को सरकारी नौकरियों से लेकर शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण मिलता है। अगर मराठाओं को कुनबी जाति का प्रमाण मिलता है तो उन्हें अपने आप आरक्षण का फायदा मिल जाएगा।
क्यों ओबीसी जाति में शामिल होना चाहता है मराठा समुदाय
ओबीसी जाति के समुदाय के लोग मराठा समुदाय में शामिल होना चाहते हैं। दरअसल, आजादी से पहले मराठवाड़ा क्षेत्र हैदराबाद के रियासत का हिस्सा था। साल 1948 में निजाम का शासन खत्म होने तक मराठाओं को कुनबी जाति माना जाता था और वो ओबीसी जाति में आते थे। इसलिए मराठाओं को कुनबी जाति में एक बार फिर जोड़ा जाए।
CM शिंदे ने तुड़वाया था अनशन
यह मांग तब चर्चा में आई जब मनोज जरांगे ने 20 जनवरी से लेकर 26 जनवरी तक जालना से नवी मुंबई तक यात्रा निकाली थी। इसके बाद वे अनशन पर बैठ गए थे। 27 जनवरी को सीएम एकनाथ शिंदे ने मनोज जरांगे को जूस पिलाकर अनशन खत्म करवाया था और मराठा आंदोलन से जुड़े ड्राफ्ट अध्यादेश की कॉपी सौंपी थी।