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माघ की बारिश मसाला फसलों में कीटनाशक का करेगी काम

गेहूं-चना और मसूर की फसल को फायदा, सरसों को नुकसान
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माघ की बारिश मसाला फसलों में कीटनाशक का करेगी काम

ग्वालियर। शुक्रवार-शनिवार को हुई बारिश ने श्योपुर के कराहल क्षेत्र में आठ से दस गांवों में सरसों की फसल खराब कर दी। अंचल के अन्य क्षेत्रों में गेहूं, मसूर और बाद में बोई सरसों को फायदा हुआ है। अंचल में मसाला सहित अन्य उद्यानिकी फसलों के लिए माघ की बारिश ने कीटनाशक का काम किया है। अफसरों ने बताया कि दिसंबर-जनवरी में ज्यादा बारिश न हुई तो उद्यानिकी, औषधि, फल और फूलों की खेती के लिए यह लाभ देने वाली साबित होगी।

इन किस्मों की हुई बोवनी

गेहूं : गेहूं की एचआई 1544, राज 4248, राज 4037, एमपी 4106, एचआईजी 8759, जीडब्ल्यू 273, जीडब्ल्यू 322 किस्में किसानों ने ज्यादा बोई हैं।

सरसों : सरसों की पीएम 30, आरएच 9749, गिरराज, आरए 0725, एनआरसीएचबी 101 किस्में बोई हैं।

चना : चने की जेजी 12, आरबीजी 201, 202,203 किस्मों को बोया है।

यह है रकबा

  • 1 लाख 25 हजार हेक्टेयर में गेहूं
  • 23 हजार हेक्टेयर में चना
  • 45 हजार हेक्टेयर में सरसों
  • 20 हजार हेक्टेयर में मटर
  • 05 हजार हेक्टेयर में मसूर

उद्यानिकी फसलें

  • 16674 हेक्टेयर में सब्जियां
  • 1409 हेक्टेयर में फल
  • 5545 हेक्टेयर में मसाला
  • 757 हेक्टेयर में फूल
  • 218 हेक्टेयर में औषधि

यह है मावठ का फायदा

  • गेहूं की बोवनी के बाद पौधे छह इंच के आसपास होते हैं। किसानों को एक पानी की बचत हुई है। बांध में पानी की बचत रहेगी।
  • मावठ से चने की फसल में लगने वाली इल्ली झड़ जाती है, रासायनिक दवाओं की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

ज्यादा बारिश से नुकसान

मावठ की बारिश अभी सीमित मात्रा में हुई है। इसलिए उद्यानिकी और खरीफ दोनों तरह की फसलों को फायदा है, लेकिन अगर ज्यादा बारिश हुई तो कुछ फसलों में नुकसान हो सकता है। पाला पड़ने पर बचाव के इंतजाम पहले से करने होंगे। -एमपीएस बुंदेला, सहायक संचालक-उद्यानिकी

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