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भोपाल के मालीखेड़ी विसर्जन कुंड में सीवेज का पानी मिलने का आरोप, 25 करोड़ की योजना पर उठे सवाल

भोपाल के जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए बनाई गई व्यवस्था ही अगर गंदगी की चपेट में आ जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है। राजधानी के मालीखेड़ी में बने कृत्रिम विसर्जन कुंड की तस्वीर कुछ ऐसी ही कहानी बयां कर रही है। जिस कुंड में देवी-प्रतिमाओं का विसर्जन होना है, उसमें सीवेज का गंदा पानी पहुंचने का आरोप है।
भोपाल के मालीखेड़ी विसर्जन कुंड में सीवेज का पानी मिलने का आरोप, 25 करोड़ की योजना पर उठे सवाल
भोपाल के मालीखेड़ी विसर्जन कुंड में सीवेज का पानी मिलने का आरोप

भोपाल। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि पानी काला पड़ गया है और गंदगी के कारण मछलियां भी मर रही हैं। ऐसे में नगर निगम की व्यवस्था और निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

विसर्जन के बाद भी नहीं हुई समय पर सफाई?

हाल ही में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद कुंड में पूजन सामग्री और अन्य अवशेष पड़े होने की शिकायत सामने आई। रहवासियों के मुताबिक, शिकायत के बाद नगर निगम ने एक दिन पहले ही मलबा हटाया। यानी सफाई की कार्रवाई शिकायत के बाद हुई। अब सीवेज के पानी और मछलियों के मरने की शिकायत ने चिंता बढ़ा दी है।

25 करोड़ खर्च, फिर भी गंदगी से राहत नहीं?

स्वच्छ भारत मिशन (SBM) के फंड से करीब 25 करोड़ रुपये की योजना के तहत भोपाल में आठ कृत्रिम विसर्जन कुंड तैयार किए गए हैं। इनका मकसद प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाना और प्रतिमा विसर्जन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराना था। लेकिन मालीखेड़ी के कुंड में सीवेज का पानी मिलने के आरोप ने इस योजना के रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि कुंड में गंदा पानी पहुंचने से रोकने के लिए क्या इंतजाम किए गए थे और उनकी निगरानी कौन कर रहा है?

आखिर कब होगी सफाई? 

कृत्रिम विसर्जन कुंड बनाने का उद्देश्य प्रदूषण रोकना था, न कि नई समस्या खड़ी करना। अब जरूरी है कि नगर निगम सीवेज के स्रोत की जांच करे, पानी की गुणवत्ता की जांच कराए और नियमित सफाई, रखरखाव की जिम्मेदारी तय करे। वरना प्रदूषण रोकने के लिए बनाई गई करोड़ों की योजना अपने ही उद्देश्य पर सवाल खड़े करती रहेगी की आखिर इसकी सफाई कब होगी और कौन करेगा।

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जिम्मेदारी से भाग रहें जिम्मेदार

जब इस मामले पर संतोष गुप्ता जेई से बात करने का प्रयास किया तो वह इस मामले से बचते नजर आए पहले मीटिंग का हवाला फिर इंजीनियर से बात कहकर बचते नजर आए जबकि SBM और झील का चार्ज का चार्ज संतोष गुप्ता के पास ही है।

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पर्यावरण मित्र नितिन सक्सेना ने फोटो किया था वायरल 

बीते दिनों आरटीआई कार्यकर्त्ता और पर्यावरण मित्र नितिन सक्सेना ने भी इन फोटो को सोशल मीडिया पर वायरल किया था जिस पर नगर निगम के चुनिंदा जिम्मेदार अधिकारी ने सक्सेना को इस मामले अपनी छवि चमकाने के चककर में सफाई देने की कोशिश की थी। 

Amit Sen
By Amit Sen

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