सीहोर: 151 मीटर लंबी चुनरी में झलकी भक्तों की अटूट आस्था, 14 वर्षों से जारी है परंपरा
सीहोर। मां के जयकारे, हाथों में श्रद्धा का भाव, कदमों में उत्साह और चेहरे पर भक्ति की चमक… सीहोर में गुरुवार को निकली करौली वाली माता की भव्य चुनरी यात्रा ने पूरे शहर को आस्था के रंग में सराबोर कर दिया। मां जगदंबा को 151 मीटर लंबी चुनरी अर्पित करने निकले इस विशाल धार्मिक कारवां में 15 हजार से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए। करीब सात किलोमीटर लंबे यात्रा मार्ग पर गूंजते जयकारों, हेलीकॉप्टर से हुई पुष्पवर्षा, गरबा करती बच्चियों, आकर्षक झांकियों और अखाड़ों की प्रस्तुतियों ने आयोजन को यादगार बना दिया। जगह-जगह बने स्वागत द्वारों पर श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बना। पिछले 14 वर्षों से जारी यह परंपरा इस बार भी सामूहिक आस्था और सांस्कृतिक एकजुटता की जीवंत तस्वीर बनकर सामने आई।
मां के जयकारों से गूंज उठा शहर, उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
करौली वाली माता मंदिर से शुरू हुई चुनरी यात्रा में महिलाओं, युवाओं, बच्चियों और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ी, वैसे-वैसे भक्तिमय माहौल और उत्साह गहराता गया। माता रानी के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा। श्रद्धालुओं के लिए यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि मां के प्रति अपनी श्रद्धा, विश्वास और समर्पण व्यक्त करने का विशेष अवसर था।
151 मीटर लंबी चुनरी में झलकी भक्तों की अटूट आस्था
इस वर्ष मां करौली वाली को 151 मीटर लंबी चुनरी अर्पित की गई। चुनरी यात्रा का यह प्रमुख आकर्षण रहा। श्रद्धालुओं ने पूरे भक्तिभाव के साथ माता रानी की आराधना की। लंबी चुनरी के साथ आगे बढ़ता भक्तों का कारवां आस्था की उस भावना को प्रदर्शित कर रहा था, जिसमें हजारों लोग एक ही विश्वास और एक ही भाव के साथ सहभागी बने। आयोजन ने धार्मिक परंपरा के प्रति लोगों के गहरे जुड़ाव को सामने रखा।
आसमान से बरसे फूल, भक्तों के लिए यादगार बना पल
यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की गई। आसमान से बरसते फूलों और नीचे गूंजते मां के जयकारों ने आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया। श्रद्धालुओं के लिए यह दृश्य खास आकर्षण का केंद्र रहा। फूलों की बारिश के बीच आगे बढ़ती यात्रा ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया। भक्ति और उल्लास का यह संगम चुनरी यात्रा की यादों में लंबे समय तक बना रहने वाला पल साबित हुआ।
गरबा करती बच्चियों ने बांधा समां, झांकियों ने मोहा मन
चुनरी यात्रा में बच्चियां गरबा करती हुई आगे बढ़ीं। उनकी प्रस्तुतियों ने आयोजन में सांस्कृतिक रंग भर दिए। आकर्षक झांकियों, अखाड़ों और उज्जैन से आए कलाकारों की प्रस्तुतियों ने भी श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा। धार्मिक आस्था के साथ लोक-संस्कृति और परंपराओं की झलक ने यात्रा को विशेष स्वरूप दिया। मातृशक्ति की बड़ी भागीदारी ने भी आयोजन की रौनक बढ़ाई।
गंज क्षेत्र सहित कई स्थानों पर हुआ भव्य स्वागत
यात्रा के स्वागत के लिए शहर के प्रमुख मार्गों पर सामाजिक संगठनों, विभिन्न समाजों और जनप्रतिनिधियों की ओर से मंच और स्वागत द्वार बनाए गए थे। गंज क्षेत्र सहित अनेक स्थानों पर श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया। विभिन्न संगठनों की सहभागिता ने आयोजन को सामूहिक उत्सव का रूप दिया। शहरवासियों की भागीदारी से यह संदेश भी सामने आया कि धार्मिक परंपराएं समाज को जोड़ने और आपसी सद्भाव मजबूत करने का माध्यम बन सकती हैं।
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14 वर्षों से जारी परंपरा, नई पीढ़ी तक पहुंच रही संस्कृति
सीहोर में चुनरी यात्रा पिछले 14 वर्षों से लगातार आयोजित की जा रही है। नगर पालिका अध्यक्ष एवं हिंद रक्षक युवा समिति के संरक्षक प्रिंस राठौर ने इस आयोजन को आस्था, श्रद्धा और सनातन संस्कृति से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर बताया है। उनका कहना है कि धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाना और युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति तथा संस्कारों से जोड़ना सभी का दायित्व है। हर वर्ष श्रद्धालुओं की भागीदारी इस आयोजन को और व्यापक स्वरूप देती है।
सांसद, विधायक और जनप्रतिनिधियों ने भी की सहभागिता
चुनरी यात्रा में सांसद आलोक शर्मा, विधायक सुदेश राय, नगर पालिका अध्यक्ष प्रिंस राठौर और यात्रा आयोजक विवेक राठौर , पूर्व विधायक रमेश सक्सेना ,सन्नी महाजन सहित अनेक जनप्रतिनिधि शामिल हुए। श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी ने आयोजन को शहर के प्रमुख धार्मिक कार्यक्रमों में विशेष पहचान दिलाई।
आस्था, संस्कृति और एकजुटता की याद छोड़ गई यात्रा
151 मीटर की चुनरी, हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता और हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा के बीच निकली चुनरी यात्रा ने सीहोर में भक्ति का भव्य दृश्य प्रस्तुत किया। मां के जयकारों के साथ आगे बढ़ता यह कारवां श्रद्धा, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सहभागिता का प्रतीक बना। आयोजन ने एक बार फिर दिखाया कि आस्था जब सामूहिक रूप लेती है, तो वह पूरे शहर को एक सूत्र में पिरो सकती है।






















