PU Special :दिव्यांग बच्चे नहीं, फिर भी शिक्षकों को ट्रेनिंग; भोपाल के 7500 शिक्षक प्रभावित, स्कूलों में पढ़ाई पर असर

रामचन्द्र पाण्डेय, भोपाल। प्रशिक्षण के साथ शिक्षकों पर समग्र आईडी में सुधार, ऑनलाइन पोर्टलों पर जानकारी दर्ज करने और बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की चुनाव संबंधी ड्यूटी का भी बोझ है। इससे नियमित कक्षाओं के संचालन, पाठ्यक्रम पूरा करने और कमजोर विद्यार्थियों को अतिरिक्त समय देने की चुनौती बढ़ रही है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। संगठन ने मांग की है कि प्रशिक्षण स्कूलों की वास्तविक जरूरत और दिव्यांग विद्यार्थियों की मौजूदगी के आधार पर कराया जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।
दिव्यांग बच्चे नहीं, फिर भी शिक्षकों को प्रशिक्षण
सरकारी स्कूलों में फिलहाल ऐसी स्थिति दिखाई दे रही है, जहां कक्षा में बच्चे शिक्षक का इंतजार कर रहे हैं और दूसरी ओर शिक्षक मोबाइल पर प्रशिक्षण ले रहे हैं। दिव्यांग विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए उन स्कूलों के शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जहां दिव्यांग बच्चे नहीं हैं। इससे नियमित पढ़ाई प्रभावित होने के साथ पाठ्यक्रम पूरा करने और कमजोर विद्यार्थियों को अतिरिक्त समय देने की चुनौती बढ़ रही है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।
प्रशिक्षण के अलावा शिक्षकों पर काम का बोझ
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का समय केवल पढ़ाने में ही नहीं, बल्कि समग्र आईडी में सुधार और ऑनलाइन पोर्टलों पर जानकारी दर्ज करने में भी खर्च हो रहा है। इसके अलावा बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की चुनाव संबंधी ड्यूटी भी शिक्षकों को करनी पड़ रही है। विभागीय प्रशिक्षण में शामिल होने से नियमित कक्षाओं के संचालन पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। इसका असर बच्चों की पढ़ाई, पाठ्यक्रम पूरा करने और कमजोर विद्यार्थियों को अतिरिक्त समय देने पर पड़ रहा है।
बोदाखो और धोली उमर में दिव्यांग विद्यार्थी नहीं
राजधानी के सरकारी प्राथमिक शाला बोदाखो में 84 विद्यार्थियों पर तीन शिक्षक पदस्थ हैं, जबकि धोली उमर में 34 बच्चों को पढ़ाने के लिए दो शिक्षक हैं। दोनों स्कूलों में एक भी दिव्यांग विद्यार्थी नामांकित नहीं है। इसके बावजूद शिक्षकों को प्रशिक्षण और विभागीय प्रक्रियाओं में समय देना पड़ रहा है। इससे नियमित पढ़ाई के लिए उपलब्ध समय कम होने और कक्षाओं के संचालन पर असर पड़ने की स्थिति बन रही है।
पीपलिया कुंजदगढ़ और सेमरी खुर्द में भी यही स्थिति
शासकीय प्राथमिक शाला पीपलिया कुंजदगढ़ में 140 विद्यार्थियों के लिए केवल तीन शिक्षक हैं। वहीं, शासकीय प्राथमिक शाला सेमरी खुर्द में 36 बालक-बालिकाओं को पढ़ाने के लिए दो शिक्षक पदस्थ हैं। दोनों विद्यालयों में एक भी दिव्यांग बच्चा नहीं है, इसके बावजूद शिक्षकों पर प्रशस्त ऐप के माध्यम से प्रशिक्षण लेने और आधार के जरिए दिव्यांग बच्चों से संबंधित जानकारी डाउनलोड करने का दबाव है। इन प्रक्रियाओं के साथ अन्य विभागीय काम पूरे करने से नियमित पढ़ाई के लिए समय निकालना मुश्किल हो रहा है।
शिक्षकों की मांग, जरूरत के अनुसार हो प्रशिक्षण
अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा की मांग है कि दिव्यांग विद्यार्थियों की मौजूदगी और स्कूल की जरूरत के अनुसार ही प्रशिक्षण कराया जाए। शिक्षकों को अनावश्यक गैर-शैक्षणिक कार्यों से राहत देने के साथ बीएलओ ड्यूटी तय करते समय स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता का ध्यान रखा जाए। समग्र आईडी और ऑनलाइन कामों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाने की मांग भी की गई है। संगठन चाहता है कि मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री और लोक शिक्षण आयुक्त इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें।
शिक्षा विभाग ने अनावश्यक कामों पर विचार की बात कही
अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के प्रांतीय संयोजक राकेश पटेल ने कहा कि प्रदेश के अधिकांश स्कूलों में दिव्यांग बच्चे नहीं होने के बावजूद शिक्षकों को प्रशिक्षण में शामिल किया जा रहा है। प्रशिक्षण वास्तविक जरूरत के अनुसार होना चाहिए, ताकि बच्चों की नियमित पढ़ाई प्रभावित न हो और स्कूलों की स्थिति के हिसाब से व्यवस्था बनाई जाए। वहीं, लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने कहा कि राष्ट्रहित से जुड़े कार्य करना अनिवार्य है और उन्हें बदला या बंद नहीं किया जा सकता। विभाग से जुड़े ऐसे कार्य, जो अनावश्यक रूप से कराए जा रहे हैं, उन पर विचार किया जाएगा।




















