ताजा खबरभोपालमध्य प्रदेश

राजस्थान की गर्मी से फायदा लेगी मप्र सरकार

अशोक गौतम-भोपाल। राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में रेडिएशन ज्यादा होने से सोलर बिजली ज्यादा तैयार होती है। इसी के चलते मुरैना और शिवपुरी में बड़े सोलर संयंत्र लगाने की कार्ययोजना बनाई जा रही है। राजस्थान से लगे इन क्षेत्रों में ज्यादा बिजली तैयार होने के कारण अन्य सोलर संयंत्रों की तुलना में यहां की बिजली 25 से लेकर 50 पैसे कम दर पर बेची रही है।

अभी सबसे कम दर नीमच में है। यहां सोलर से बनने वाली 500 मेगावाट बिजली 2.14 रुपए प्रति यूनिट बिजली बेची जा रही है। सबसे महंगी बिजली ओंकारेश्वर में बिक रही है। वर्तमान में सोलर संयंत्रों से चार हजार मेगावॉट बिजली तैयार हो रही है। इसे सरकार आठ हजार मेगावॉट तक बढ़ाने के संबंध में काम कर रही है। इसके लिए बंजर, बीहड़ भूमि की तलाश की जा रही है।

इसके दो फायदे

  • रेडिएशन ज्यादा होने से सीमावर्ती जिलों में ज्यादा बन रही सोलर बिजली
  • ज्यादा बिजली बनने से कम दरों पर बेच सकेंगे,  अभी नीमच में 2.14 रुपए प्रति यूनिट की दर

जानिए प्लानिंग के तीन चरण

  • सोलर संयंत्र लगाना : मुरैना, विदिशा, धार, सागर शिवपुरी में करीब 15 सौ मेगावाट बिजली तैयार करने के लिए प्लान किया जा रहा है। मुरैना में पीपीपी मोड पर निजी निवेशकों के जरिए सोलर संयंत्र लगाने के लिए निविदा भी जारी कर दी गई है। रीवा और शाजापुर में 750 मेगावॉट बिजली बन रही है।
  • 10 हजार मेगावाट बिजली बनाना : जगह-जगह सोलर पार्क बनाने से जल और ताप विद्युत पर सरकार की निर्भरता कम होगी। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में करीब 5-7 साल के अंदर 10 हजार मेगावाट की बिजली सोलर से तैयार की जाए, इससे गर्मी में बिजली की समस्यासे राहत मिल सकेगी।
  • रूफटॉप सोलर को बढ़ावा : घरों के उपयोग के लिए 60 फीसदी (रूफटॉप ) बिजली लोगों को खुद तैयार करने पर सरकार जोर दे रही है। इसी के चलते सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना में 78 हजार रुपए तक सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है।

राजस्थान सौर ऊर्जा में देश में पहले नंबर पर

राजस्थान सौर ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश के लिहाज से देश-दुनिया में सबसे उपयुक्त इलाकों में से एक है। लगभग 22,860 मेगावाट की संस्थापित क्षमता के साथ यह सौर ऊर्जा में देश में पहले स्थान पर है । राजस्थान का लगभग 2,08,110 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र रेगिस्तानी है । इस साल की शुरुआत में राजस्थान की संस्थापित सौर क्षमता 18 गीगावाट से अधिक हो गई और यह सौर ऊर्जा उत्पादन में देश का अग्रणी है।

एक्सपर्ट से जानिए राजस्थान के रेडिएशन में ऐसा क्या…

राजस्थान में गर्मी और गर्म हवाओं के चलते प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में सोलर बिजली ज्यादा तैयार होती है। इसके चलते सरकार का इन जिलों में सोलर संयंत्र लगाने पर ज्यादा फोकस होता है। इसके साथ में राजस्थान सीमा से लगे जिलों में जमीन की उपलब्धता ज्यादा होती है। -सुरेन्द्र वाजपेयी,सेवा निवृत्त, ईएनसी, मप्र ऊर्जा विकास निगम

निवेशकों की तलाश जारी, कई जगह टेंडर भी हो चुके

प्रदेश के कई जिलों में सोलर संयंत्र लगाने की तैयारी की जा रही है। मुरैना सहित कुछ जिलों के टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं। पीपीपी मोड पर बिजली खरीदने वालों और निवेशकों की तलाश की जा रही है। जल्द ही संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। -नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव, ऊर्जा विभाग

संबंधित खबरें...

Back to top button