45 डिग्री झुकी है मां कंकाली की गर्दन, नवरात्रि में सीधी होने की मान्यता; जानिए मंदिर का इतिहास

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के गुदावल गांव में स्थित कंकाली माता मंदिर अपनी अनोखी प्रतिमा और नवरात्रि से जुड़ी मान्यता के लिए जाना जाता है। जानिए मंदिर का इतिहास और निर्माण से जुड़ी खास बातें।
45 डिग्री झुकी है मां कंकाली की गर्दन, नवरात्रि में सीधी होने की मान्यता; जानिए मंदिर का इतिहास

भोपाल से करीब 18 किलोमीटर दूर रायसेन जिले के गुदावल गांव में स्थित कंकाली माता मंदिर अपनी अनोखी प्रतिमा के लिए जाना जाता है। यहां मां कंकाली की प्रतिमा की गर्दन करीब 45 डिग्री एक तरफ झुकी हुई है। मंदिर से जुड़ी मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान साल में किसी एक दिन माता की गर्दन कुछ समय के लिए सीधी हो जाती है। इसी मान्यता और मंदिर के इतिहास के बारे में जानने के लिए श्रद्धालुओं के बीच उत्सुकता रहती है। नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

मां कंकाली की प्रतिमा की झुकी गर्दन है खास

मंदिर में विराजमान मां कंकाली की प्रतिमा की झुकी हुई गर्दन इसकी सबसे खास विशेषता मानी जाती है। प्रतिमा को देखने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि गर्दन एक तरफ क्यों झुकी हुई है। इसी से जुड़ी एक प्रचलित मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के दौरान साल में एक दिन माता की गर्दन कुछ समय के लिए सीधी हो जाती है। हालांकि, गर्दन सीधी होने की इस मान्यता की प्रत्यक्ष पुष्टि नहीं है। इसे मंदिर से जुड़ी लोकमान्यता के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। प्रतिमा की यह विशेषता मंदिर को अलग पहचान देती है और यहां आने वाले भक्तों के बीच जिज्ञासा का विषय बनी रहती है।

खुदाई के दौरान मिली थी माता की प्रतिमा

कंकाली माता मंदिर के इतिहास से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश से बाबा बृजमोहनदास इस स्थान पर आए थे। उन्होंने यहां अपनी कुटिया बनाई और रहने लगे। बताया जाता है कि इसी दौरान खुदाई करते समय मां कंकाली की प्रतिमा मिली थी। इसके बाद प्रतिमा को उसी स्थान पर स्थापित कर दिया गया। जानकारी के अनुसार, बाबा बृजमोहनदास 40 साल से अधिक समय तक यहां रहे। उनके बाद बाबा मंगलदासजी के सानिध्य में मंदिर की व्यवस्थाएं संभाली जाने लगीं। समय के साथ यह स्थान श्रद्धालुओं के आने-जाने और पूजा-अर्चना का केंद्र बन गया। मंदिर से जुड़ी पुरानी जानकारी में इन संतों की भूमिका का उल्लेख मिलता है।

नवरात्रि में उमड़ते हैं श्रद्धालु

नवरात्रि के दौरान कंकाली माता मंदिर में विशेष चहल-पहल रहती है। इन दिनों दूर-दूर से भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और मंदिर परिसर में मेले जैसा माहौल दिखाई देता है। श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने के साथ मंदिर की प्रतिमा और उससे जुड़ी मान्यताओं के बारे में भी जानकारी लेते हैं। भोपाल से करीब 18 किलोमीटर की दूरी पर होने के कारण यह मंदिर आसपास के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी पहुंच के लिहाज से नजदीक है। नवरात्रि के समय मंदिर में होने वाली गतिविधियों के चलते यहां भक्तों की आवाजाही बढ़ जाती है।

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23 हजार वर्गफीट में मंदिर के निर्माण की योजना

कंकाली माता मंदिर में प्रतिमा और मान्यताओं के अलावा निर्माण कार्य भी चर्चा में रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मंदिर के जीर्णोद्धार और विस्तार की योजना करीब 23 हजार वर्गफीट क्षेत्र में बनाई गई है। मंदिर के आठों कोनों में अलग-अलग देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित करने की योजना का भी उल्लेख है। निर्माण योजना के अनुसार, मंदिर के भीतर करीब 10 हजार वर्गफीट का हॉल बनाया जा रहा है। इसकी खासियत यह बताई गई है कि हॉल में एक भी पिलर नहीं है। इसके अलावा परिसर में उपवन, धर्मशाला और गोशाला बनाने की योजना भी शामिल है। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य मंदिर परिसर का विस्तार करना और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं विकसित करना बताया गया है।

मंदिर के निर्माण और जीर्णोद्धार का काम दानदाताओं के सहयोग से किया जा रहा है। मंदिर से संबंधित उपलब्ध जानकारी में निर्माण पर अब तक दो करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का उल्लेख भी मिलता है। हालांकि, निर्माण कार्य की मौजूदा स्थिति की अलग से पुष्टि जरूरी है। कंकाली माता मंदिर अपनी अनोखी प्रतिमा, उससे जुड़ी नवरात्रि की मान्यता और इतिहास के कारण क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता है। यहां की झुकी गर्दन से जुड़ी लोकमान्यता श्रद्धालुओं के बीच आज भी उत्सुकता पैदा करती है।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...

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