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खुद की परेशानियों से उबरने सीखा योग, अब विदेशियों की ले रहे ऑनलाइन क्लास

इंटरनेशनल डे ऑफ योग: शहर के योग इंस्ट्रक्टर यूके, दुबई, तंजानिया, सिंगापुर के लोगों को सिखा रहे योग

प्रीति जैन/ योग के फायदे वहीं समझते हैं जिन्होंने इसे जीवन में अपनाया और इससे अपने भीतर पॉजिटिव चेंज महसूस किए हों। भोपाल में ऐसे कई योग इंस्ट्रक्टर हैं, जिन्होंने जीवन में हुए हादसों व खुद की बीमारियों से उबरने के लिए योग सीखा। ऐसा करने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि कुछ और करने की बजाए योग को ही कॅरियर के रूप में अपनाया जाए क्योंकि इससे खुद के साथ दूसरों को भी स्वास्थ्य लाभ मिलेगा। तो वहीं किसी ने मेडिकल प्रैक्टिस छोड़ी ताकि लोगों के बीमार होने से पहले उन्हें निदान दें सकें, ताकि वे बीमार न हो। वहीं कुछ लोग निशुल्क योग सिखाने के लिए भी योग सीखकर अब अपनी सेवाएं दे रहे हैं। योग दिवस पर जानिए ऐसे ही लोगों के बारे में।

लगातार सिटिंग जॉब की वजह से मेरा वजन बढ़ने लगा और फिर पेट संबंधी परेशानियां आने लगी। डॉक्टरों के चक्कर लगने लगे। जॉब से आने के बाद शाम को योगा कोर्स जॉइन किया और फिर खुद प्रैक्टिस करने लगा, इससे मेरी फिटनेस इतनी बेहतर हो गई कि कई लोग मेरे पास आकर फिटनेस ट्रेनिंग की मांग करने लगे। आज मैं नीदरलैंड्स, तंजानिया, बांग्लादेश, यूएस के लोगों को ऑनलाइन योग सीखा रहा हूं। – संदीप कुमार लोवंशी, योग प्रशिक्षक

सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया के लोगों को सिखाता हंू

मैं फुलटाइम होम्योपैथी डॉक्टर था और मेरे दो क्लीनिक भी चल रहे थे। मैं देखता था तमाम बीमारियां होने के बाद इलाज के लिए लोग आते हैं, क्यों न ऐसा हो कि लोग कम से कम बीमार पड़े, इसी सोच के साथ योग में एमए किया और फिर और गहराई से इसके फायदे पता चले तो पीएचडी भी की। इसके बाद योग सीखने की डिमांड इतनी आने लगी कि मैंने मेडिकल प्रैक्टिस छोड़कर फुल टाइम योग सेंटर शुरू कर दिया। अब सिंगापुर, दुबई, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के लोगों को रेगुलर ऑनलाइन योग सीखा रहा हूं। -डॉ. मोहित तवर, योग एक्सपर्ट

नि:शुल्क सिखाने के लिए पहले खुद योग सीखा

मैंने योग की पढ़ाई इसलिए की ताकि जो लोग फीस नहीं दे सकते उन्हें योग सीखा सकूं। ओल्ड एज होम से लेकर बच्चों तक को नि:शुल्क योग सिखाती हूं। दुबई, मुंबई, बैंगलुरु व हैदराबाद से लोग योग सीखने के लिए कनेक्ट होते हैं। पीसीओडी व पोस्ट डिलीवरी के बाद महिलाओं को योग की खास जरूरत होती है क्योंकि लाइफ में काफी बदलाव और भागदौड़ बढ़ जाती है। मैंने अपने भीतर बदलाव महसूस किए तभी योग को आगे जारी रखा, क्योंकि इससे गुस्सा व तनाव नियंत्रित होता है क्योंकि बॉडी के सभी ऑर्गन ठीक तरह से काम करते हैं और मन शांत रहता है। मैं पिछले सात साल से योग सिखा रही हूं। -नीतू गौतम, योग इंस्ट्रक्टर

हादसे से उबरने सीखा था योग

मैंने एक्सीडेंट के हादसे से उबरने के लिए योग सीखा था। इस दौरान पढ़ाई में चार साल का गैप आ चुका था और मैं परेशान रहने लगी क्योंकि कोई भी काम शुरू करने के बाद पूरा नहीं कर पाती थी। सोचा योग करके मन को शांति मिलेगी और वाकई ऐसा हुआ, फिर मैंने सोचा क्यों न योग में ही आगे बढ़ा जाए और फिर इसमें मास्टर करने के बाद ऋषिकेश से एडवांस योग सीखा। आज भोपाल में दो सेंटर पर योग सीखाती हूं, एक तो मैंने अपनी चार फ्रेंड्स के साथ मिलकर ऑरा मॉल के पास शुरू किया है। – जानकी भदौरिया, योग इंस्ट्रक्टर

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