कोलकाता डॉक्टर रेप-मर्डर केस : कलकत्ता HC ने राज्य सरकार से कहा- अपनी रिपोर्ट अपने पास रखें, अब 4 सितंबर को होगी सुनवाई

कोलकाता/नई दिल्ली। कोलकाता मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर रेप और मर्डर केस मामले में आज (21 अगस्त) कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान बंगाल सरकार ने मामले से जुड़ी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने की बात कही। जिस पर कोर्ट ने कहा कि, रिपोर्ट अपने पास रखिए इसे सुप्रीम कोर्ट में दिखाइए। क्योंकि मामले पर सुप्रीम कोर्ट संज्ञान ले चुका है।
वहीं याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि, पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष की जांच के लिए राज्य सरकार ने SIT बनाई है। यह उन्हें बचाने के लिए एक दिखावा है। हालांकि, कोर्ट ने इस मामले को अब 4 सितंबर को सुनने की बात कही।
HC ने पूछा था- पुलिस क्या कर रही थी?
इस मामले में हाईकोर्ट में पिछली सुनवाई 16 अगस्त को हुई थी। उस समय चीफ जस्टिस टीएस शिवगनम ने राज्य सरकार और पुलिस को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने सवाल किया था कि, अस्पताल में तोड़फोड़ के लिए 7 हजार की भीड़ आई थी। पुलिस क्या कर रही थी? कोर्ट ने कहा कि, पुलिस खुद को नहीं बचा पा रही, तो डॉक्टर निडर होकर कैसे काम करेंगे।
SC ने राज्य सरकार और CBI से मांगी रिपोर्ट
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने 20 अगस्त को सुनवाई की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई और राज्य सरकार से घटना की रिपोर्ट मांगी। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि, प्रिंसिपल का आचरण जांच के दायरे में है तो उसको तुरंत दूसरे कॉलेज का प्रिंसिपल कैसे नियुक्त किया गया। सीजेआई ने मामले की जांच के लिए पहले ही एसआईटी टीम के गठन का निर्देश दिया था। जो प्रदर्शन के दौरान आरजी कर मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में हुई तोड़फोड़ की जांच करेगी। कोर्ट ने CBI से 22 अगस्त तक स्टेटस रिपोर्ट और राज्य सरकार से घटना की रिपोर्ट मांगी है। मेडिकल कॉलेज के सुरक्षा का जिम्मेदारी CISF सौंपी गई है। केस की अगली सुनवाई 23 अगस्त को होगी।
डॉक्टरों की सुरक्षा पर जताई चिंता
चीफ जस्टिस ने डॉक्टरों की सुरक्षा पर चिंता जताई। डॉक्टरों के लिए रेस्ट रूम नहीं होने पर भी सवाल किए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों, महिला डॉक्टरों, रेजिडेंट और नॉन रेजिडेंट डॉक्टरों को सुरक्षा न मिल पाने से हम चिंतित हैं। पुरुष और महिला डॉक्टरों के लिए कोई अलग से रेस्ट रूम और ड्यूटी रूम नहीं है। महिलाओं को सुरक्षा न मिल पाने को लेकर संविधान के तहत समानता के अधिकार की भी बात की। इंटरनेट और मीडिया में पीड़िता का नाम, फोटो और वीडियो साझा करने को लेकर चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि क्या हम इस तरह से पीड़िता का सम्मान करेंगे। इसके लिए उचित प्रोटोकॉल क्यों नहीं बनाए गए।
नेशनल टास्क फोर्स का गठन
सीजेआई ने नेशनल टास्क फोर्स गठन करने की घोषणा की। जिसमें शामिल सदस्य पूरे भारत में अपनाए जाने वाले सुरक्षा के तौर-तरीकों का सुझाव देंगे। इससे डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर कदम उठाए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इसमें 9 डॉक्टरों को शामिल किया है, जो तीन सप्ताह में अंतरिम रिपोर्ट और दो महीने में फाइनल रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को देगी। इसके साथ ही टास्क फोर्स में केंद्र सरकार के पांच अधिकारी भी शामिल किए गए हैं। इस टास्क फोर्स में कैबिनेट सेक्रेटरी, हेल्थ सेक्रेटरी के अलावा एम्स के डायरेक्टर डॉ. एम श्रीनिवास, डॉ. सोमाकिरा, डॉ. गोवर्धन दत्त, डॉ. प्रतिमा मूर्ति, डॉ. डी नागेश्वर रेड्डी, प्रो. अनीता सक्सेना और डॉ.पद्मा श्रीवास्तव शामिल हैं। साथ ही इसमें भारत सरकार के कैबिनेट सचिव, भारत सरकार के गृह सचिव, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव, नेशनल मेडिकल कमीशन के अध्यक्ष और नेशनल बोर्ड ऑफ इग्जामिनर्स के अध्यक्ष भी शामिल होंगे।




















