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‘कंगारू फादर केयर’, पिता की जादुई झप्पी दे रही कमजोर बच्चों को नया जीवन

काटजू अस्पताल में पिता के स्पर्श से एक महीने में सुधरी नवजात की सेहत, वजन 990 से बढ़कर 1650 ग्राम हुआ

प्रवीण श्रीवास्तव-भोपाल। कोटरा निवासी रानी ने हाल ही में भोपाल के काटजू अस्पताल में बेटे को जन्म दिया। बच्चा बहुत कमजोर था और उसका वजन मात्र 990 ग्राम ही था। सांस लेने में तकलीफ के साथ मांसपेशियों में अकड़न थी। उसकी स्थिति को देखते हुए तत्काल एसएनसीयू में उपचार के साथ डॉक्टर ने कंगारू मदर केयर (केएमसी) की सलाह दी। लेकिन मां की स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह बच्चे को केएमसी दे सके।

ऐसे में डॉक्टरों की सलाह पर पिता ने उसे केएमसी थैरेपी दी। करीब एक महीने की थैरेपी सेशन के बाद उसका वजन बढ़कर 1,650 ग्राम हो गया। दरअसल, जन्म के समय कमजोर बच्चों के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रयोग शुरू किया है। इसके तहत मां के बजाय पिता, मामा भी केएमसी दे रहे हैं। करीब एक साल पहले शुरू इस प्रयोग में अब तक एक दर्जन से ज्यादा पिता नवजातों को नया जीवन दे चुके हैं।

रोजाना 8 घंटे का केएमसी सेशन होता है जरूरी

डॉक्टरों के अनुसार, कंगारू मदर केयर थैरेपी छह महीने तक करना चाहिए। ढाई किलो से कम वजन या फिर प्रीमेच्योर नवजात, जिनका वजन 1800 ग्राम से कम होता है, को यह यह थैरेपी दी जाती है। नवजात को रोजाना 8 घंटे (2-2 घंटे की सीटिंग) तक केएमसी देना चाहिए। इससे वजन नॉर्मल बच्चे जितना हो जाता है। मालूम हो कि प्रत्येक 100 बच्चों में से 25 फीसदी बच्चों को केएमसी की जरूरत होती हे।

क्या है कंगारू मदर केयर

मां बच्चे को खुद से चिपकाती है तो त्वचा से ऊष्मा पैदा होती है, जिससे बच्चों के शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है। 1970 के दशक में अमेरिका के कुछ अस्पतालों में इसकी शुरुआत हुई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, इस तकनीक से शिशु मृत्यु दर 90 प्रतिशत तक कम हो जाती है। इसकी खास बात यह होती है कि इससे माता-पिता के तापमान के मुताबिक बच्चे का तापमान भी बदलता रहता है, जबकि इन्क्यूबेटर में रहने से तापमान हमेशा एक सा बना रहता है।

विशेषज्ञ का कहना है

परिवार के लोगों के देखभाल करने से नवजात के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। गर्भ से ही नवजात अपनी मां की आवाज और दिल की धड़कन को पहचानने लगता है। इसलिए इस केयर से नवजात खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करता है। मां के पास नवजात के रहने से स्किन-टूस्कि न कॉन्टैक्ट से ब्रेस्ट में दूध भी ज्यादा आता है। मां आसानी से उसे फीड करा सकती है। – डॉ. श्रद्धा अग्रवाल, काटजू अस्पताल, महिला रोग विशेषज्ञ

परिणाम उत्साहजनक रहे

माता-पिता के स्पर्श से बीमार नवजातों में तेजी से सुधार आता है। कई बार मां की स्थिति ऐसी नहीं होती कि वे केएमसी दे सकें, ऐसे में हमने पिता यहां तक कि मामा के माध्यम से भी केएमसी का प्रयोग किया है। इसके परिणाम भी उत्साह जनक हैं। – डॉ. हिमानी यादव, डिप्टी डायरेक्टर चाइल्ड हेल्थ, मप्र

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