
अमृतसर। कंगना रनौत की फिल्म इमरजेंसी को सेंसर बोर्ड की तरफ से राहत मिली है। तमाम विरोधों के बावजूद फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने U/A सर्टिफिकेट दिया है। इस फिल्म के कई सीन पर सेंसर बोर्ड ने आपत्ति दर्ज की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, CBFC ने फिल्म में 3 सीन डिलीट करने के सख्त निर्देश के साथ ही 10 बदलाव के बाद फिल्म को रिलीज करने की हिदायत दी है। बता दें, इमरजेंसी फिल्म की रिलीज से पहले देशभर में सिख समुदाय के आक्रोश के चलते सेंसर बोर्ड ने सर्टिफिकेट जारी करने पर रोक लगा दी थी। सिख समुदाय का कहना था कि फिल्म में उनके समुदाय को गलत तरीके से चित्रित करने की आशंका है।
सेंसर बोर्ड (CBFC) ने फिल्म “इमरजेंसी” के कुछ दृश्यों और संवादों पर आपत्ति जताते हुए प्रोड्यूसर और डायरेक्टर को सुधारों के निर्देश दिए हैं।
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विवादित बयानों के सोर्स पेश करने का निर्देश
फिल्म में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड मिल्हौस निक्सन द्वारा भारतीय महिलाओं पर की गई अपमानजनक टिप्पणी और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल द्वारा भारतीयों को लेकर दिए गए विवादित बयान को लेकर सेंसर बोर्ड ने फैक्ट्स और सोर्स प्रस्तुत करने को कहा है। CBFC का निर्देश है कि मेकर्स को इन विवादित बयानों के प्रमाणित स्रोत दिखाने होंगे।
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सिख संगठनों द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर बदलाव
CBFC ने मणिकर्णिका फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड को 10 बदलावों की सूची भेजी है। इन बदलावों में अधिकतर वे दृश्य शामिल हैं, जिन पर सिख संगठनों ने आपत्ति जताई थी। इन संगठनों का मानना है कि फिल्म में कुछ सीन उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचा सकते हैं, इसलिए बोर्ड ने फिल्म के निर्माता को इन्हें सुधारने की सलाह दी है।
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बांग्लादेशी शरणार्थियों पर पाकिस्तानी हमले का दृश्य
फिल्म में एक सीन दिखाया गया है जिसमें पाकिस्तानी सैनिकों को बांग्लादेशी शरणार्थियों, खासकर महिलाओं और बच्चों पर हमला करते हुए दर्शाया गया है। CBFC ने इस सीन पर भी आपत्ति जताते हुए कहा है कि इसे या तो बदल दिया जाए या पूरी तरह से हटा दिया जाए।
क्या है U/A सर्टिफिकेट ?
फिल्म की रिलीज से पहले इसे सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट मिलना बहुत जरूरी है। सेंसर बोर्ड द्वारा 4 तरह के सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं। जिसमें से एक कैटेगरी U/A फिल्म की होती है। U/A सर्टिफिकेट का मतलब, वयस्क इस फिल्म को देख सकते हैं। लेकिन, 12 साल से कम उम्र के बच्चे ऐसी फिल्मों को सिर्फ अपने माता-पिता की निगरानी में ही देख सकते हैं।