
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1.12 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश किया, जिसमें कल्याण और विकास पर विशेष जोर दिया गया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार में वित्त विभाग की भी जिम्मेदारी संभाल रहे अब्दुल्ला ने विधानसभा में शून्य घाटे का यह बजट प्रस्तुत किया।
यह बजट जम्मू-कश्मीर के 2019 में केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद पहली बार पेश किया गया, जिसे विधानसभा सदस्यों ने तालियां बजाकर स्वागत किया। जम्मू और कश्मीर से 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 को समाप्त किया गया था और 2018 में पीडीपी-बीजेपी सरकार के तहत आखिरी बजट सत्र हुआ था।
समृद्ध और आत्मनिर्भर जम्मू-कश्मीर का लक्ष्य
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने बजट भाषण में कहा कि यह एक नए और समृद्ध जम्मू-कश्मीर का खाका है, जो लोगों की आकांक्षाओं को दर्शाता है और आर्थिक वृद्धि, सामाजिक प्रगति और टिकाऊ विकास के लिए एक मजबूत नींव रखता है। उन्होंने कहा, “वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कुल शुद्ध बजट अनुमान 1,12,310 करोड़ रुपए है, जिसमें अर्थोपाय ऋण और ओवरड्राफ्ट के प्रावधान शामिल नहीं हैं।”
राजस्व और व्यय का ब्योरा
बजट के तहत अनुमानित राजस्व प्राप्तियां 97,982 करोड़ रुपये और पूंजीगत प्राप्तियां 14,328 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इसी तरह, राजस्व व्यय 79,703 करोड़ रुपये और पूंजीगत व्यय 32,607 करोड़ रुपये रहने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर को केंद्रीय सहायता के रूप में 41,000 करोड़ रुपये मिलने का भी अनुमान है।
राजकोषीय स्थिति और आर्थिक विकास
अब्दुल्ला ने 2025-26 के लिए कर एवं जीडीपी अनुपात 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जबकि राजकोषीय घाटा जम्मू-कश्मीर के जीडीपी का 3.0 प्रतिशत रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि 2025-26 के लिए जम्मू-कश्मीर का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2,88,422 करोड़ रुपये रहने की संभावना है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.5 प्रतिशत अधिक है।
बजट की प्राथमिकताएं
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि बजट में समावेशी विकास, राजकोषीय संतुलन और विभिन्न क्षेत्रों में रणनीतिक निवेश को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे, कृषि, उद्योग, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और डिजिटल शासन को विशेष रूप से सशक्त किया जाएगा।
उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य क्षेत्रीय असमानताओं को पाटना, युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाना और निवेश एवं नवाचार को बढ़ावा देना है। साथ ही, व्यापार के अनुकूल माहौल तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।”