
बेरूत। इजराइल सेना और हिजबुल्लाह लड़ाकों के बीच संघर्ष में चार लेबनानी मारे गए। लेबनानी सैन्य ने ‘शिन्हआ’ को बताया कि इजराइल भारी तोपखाने ने देश के दक्षिण-पश्चिम के 18 और दक्षिण पूर्व के 10 शहरों समेत कुल 28 शहरों में बमबारी हुई। जिसमें 450 से अधिक विस्फोटकों और आग लगाने वाले गोले का इस्तेमाल किया गया।
लेबनान-इजराइल सीमा पर तनाव
इजराइली ड्रोन और युद्धक विमानों ने सिलसिलेवार छापे मारे, जिनमें 15 शहरों के बाहरी इलाकों को निशाना बनाकर किए गए 18 हमले शामिल है। इस बीच हिजबुल्लाह ने कहा कि उसके लड़ाकों ने प्रणित बैरक के पास एक इजराइली पैदल सेना पर मिसाइलों से हमला किया और एक अन्य पर सीमा के पास अल-धाहिरा साइट पर हमला किया। हिजबुल्लाह ने रुवैसत अल-आलम और अल-मर्ज में इजराइली ठिकानों को भी निशाना बनाया, जिससे इजराइली सेना के हताहत होने की पुष्टि हुई।
सुरक्षा रिपोर्टों के अनुसार, 8 अक्टूबर से अब तक हताहतों की कुल संख्या 101 लोगों तक पहुंच गई है। जिनमें हिजबुल्लाह के 78 सदस्य भी शामिल हैं। पिछले दिन इजराइल पर हमास के हमलों के समर्थन में 8 अक्टूबर को लेबनानी सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह द्वारा इजराइल की ओर दर्जनों रॉकेट दागे जाने के बाद लेबनान-इजराइल सीमा पर चार सप्ताह से अधिक समय तक तनाव बढ़ गया था, जिसके जवाब में इजराइली सेना ने दक्षिणपूर्वी लेबनान के कई क्षेत्र में भारी तोपखाने से गोलीबारी की।
इजराइल-हमास के बीच 7 अक्टूबर से जारी है जंग
हमास के लड़ाकों ने 7 अक्टूबर को जब शबात के दिन (यहूदियों का छुट्टी का दिन) इजराइल में घुसकर हमला कर दिया था। उसके बाद से इजराइल-हमास के बीच शुरू हुई जंग अब तक चल रही है। हमास के हमले के बाद से इजराइल ने गाजा पट्टी पर उसके ठिकानों को निशाना बनाया है।

यह है गाजा पट्टी का पूरा विवाद
गाजा पट्टी एक छोटा सा फिलिस्तीनी क्षेत्र है, यह मिस्र और इजराइल के मध्य भूमध्यसागरीय तट पर स्थित है। इस पर ‘हमास’ द्वारा शासन किया जाता है, जो इजराइल विरोधी आतंकवादी समूह है। बता दें कि, फिलिस्तीन अरबी और मुस्लिम बाहुल्य वाला इलाका है। फिलिस्तीन और कई अन्य मुस्लिम देश इजराइल को यहूदी राज्य के रूप में मानने से इंकार करते हैं।
UN ने 1947 के बाद फिलिस्तीन को एक यहूदी और एक अरब राज्य में बांट दिया था। जिसके बाद से ही फिलिस्तीन और इजराइल के बीच संर्घष जारी है। जिसमें एक अहम मुद्दा जुइश राज्य के रूप में स्वीकार करना है तो दूसरा गाजा पट्टी है। यह इजराइल की स्थापना के समय से ही इजराइल और दूसरे अरब देशों के बीच संघर्ष का कारण साबित हुआ है।