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चंदेलकालीन 168 तालाबों से सिंचाई,यह मॉडल देश में लागू करेगा नीति आयोग

जल विरासत को बचाकर छतरपुर में बढ़े उत्पादन और रोजगार के अवसर
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चंदेलकालीन 168 तालाबों से सिंचाई,यह मॉडल देश में लागू करेगा नीति आयोग

पुष्पेन्द्र सिंह, भोपाल। ग्राम खमन खेड़ा के किसान देव यादव तालाब की गाद का उपयोग करके बिना रासायनिक उर्वरक के गेहूं की फसल लेने जा रहे हैं। देव को भरोसा है कि इस बार उसे दो गुना गेहूं का उत्पादन मिलेगा। उन्हें 0.6 एकड़ भूमि में दो हजार रुपए का रासायनिक उर्वरक खरीदने की जरूरत भी नहीं पड़ी। यह संभव हो रहा है जल विरासत कार्यक्रम से, जिसकी चर्चा आज देशभर में हो रही है। अब नीति आयोग इसे पूरे देश में लागू करने का विचार कर रहा है।

प्रशासन ने डेढ़ वर्ष पहले शुरू किया था कार्यक्रम

दरअसल, सागर संभाग के छतरपुर में 9वीं से 14वीं शताब्दी के बीच चंदेल राजाओं ने जल संकट से निपटने के लिए बड़े तालाब बनाए थे। जिले में करीब 1,300 तालाबों के निर्माण की जानकारी मिलती है। इन तालाबों को आपस में अंडरग्राउंड वॉटर चैनल से जरिए जोड़ा गया था, लेकिन यही तालाब अब अपनी विरासत खोते जा रहे हैं। इन्हें बचाने के लिए कलेक्टर संदीप जीआर ने ‘जल विरासत’ कार्यक्रम प्रारंभ किया। इसमें पहली बार 168 तालाबों को हाथ में लिया गया है।

कलेक्टर ने दिल्ली में दिया प्रेजेंटेशन

अब इस छतरपुर मॉडल को नीति आयोग ने पूरे देश में लागू करने की पहल की है। दो सप्ताह पहले कलेक्टर ने दिल्ली में प्रेजेंटेशन भी दिया है। जल विरासत कार्यक्रम से जिले के किसानों को दोगुना फसल मिल रही है। सिंचाई क्षमता बढ़ी है और रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।

इसलिए विरासत बचाने बनाई गई कार्ययोजना

बुंदेलखंड क्षेत्र जल संकट से जूझ रहा है। इससे जिले में पलायन बढ़ रहा है। इसका बड़ा कारण तालाबों का पानी खत्म होना है। ऐसे तालाबों को पुनर्जीवित करने के लिए यह कार्यक्रम शुरू किया गया। किसानों का कहना है कि चयनित हर तालाब से निकाली गई गाद उन्होंने खेतों में डाली, जिससे उनकी कृषि जमीन और उपजाऊ हो गई। एक तालाब के पुनरुद्धार में करीब चार लाख की लागत आई।

सूख चुके तालाबों में बढ़ा जल स्तर

जल विरासत कार्यक्रम से चंदेलकालीन तालाबों में जल स्तर बढ़ने लगा है। इस नवाचार को नीति आयोग ने पसंद किया है और इसे देशभर में लागू करने की बात कही है। झीलों के किनारे फलों के बगीचे विकसित किए जा रहे हैं। तीन लाख से अधिक फलदार पौधे लगाए गए हैं। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार से जोड़ रहे हैं। ऑर्गेनिक फ्रूट पार्क तैयार किए जाएंगे। -संदीप जीआर, कलेक्टर, छतरपुर

खेत में तालाब की गाद मिलाने से तिल का उत्पादन डेढ़ गुना मिला है। सिंचाई का रकबा भी बढ़ गया है। अब मैं सब्जियां भी उगा रहा हूं। -संतोष कुमार (किसान), ग्राम खेड़ा, छतरपुर

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