ईरान पर अमेरिकी नाकेबंदी का बड़ा असर, 9 महीने में 25 अरब डॉलर का नुकसान: CENTCOM चीफ एडमिरल ब्रैड कूपर

वाशिंगटन। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर के मुताबिक, नौ महीने से जारी संघर्ष के बाद ईरान पर आर्थिक दबाव तेजी से बढ़ रहा है। अमेरिकी नौसेना द्वारा लगाई गई नाकेबंदी के चलते ईरान को तेल निर्यात से करीब 25 अरब डॉलर का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उसकी 350 मिलियन डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी भी फ्रीज कर दी गई है। एक वीडियो मैसेज में कूपर ने बताया कि पूरे मध्य-पूर्व में सक्रिय ईरान समर्थित संगठन ( हिजबुल्लाह, हमास और इराक के शिया मिलिशिया गुट शामिल) अब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) को पैसा लौटा रहे हैं। गौरतलब है कि IRGC ही पिछले कई सालों से इन संगठनों को आर्थिक मदद देता आ रहा था।
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IRGC खुद भी अपने जवानों को सैलरी देने में असमर्थ हो रहा
एडमिरल कूपर ने कहा, ईरान की सैन्य व्यवस्था पर वित्तीय संकट इस कदर गहरा गया है कि क्षेत्र में मौजूद ईरान समर्थक मिलिशिया समूह अपने लड़ाकों का वेतन रोककर वह रकम IRGC को वापस भेज रहे हैं। वहीं दूसरी ओर IRGC खुद भी अपने जवानों को सैलरी देने में असमर्थ हो रहा है। उन्होंने आगे कहा कि ईरानी सरकार पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों का वेतन, पेंशन और अन्य भत्ते रोक रही है। इसमें आंतरिक सुरक्षा बलों के जवान और IRGC के सदस्य भी शामिल हैं। यह आर्थिक संकट ऐसे समय में सामने आया है, जब ट्रंप प्रशासन ने तेहरान पर नौसैनिक नाकेबंदी के साथ-साथ कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। इसका उद्देश्य ईरान पर दबाव बनाकर उसे परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी रियायतों वाले समझौते के लिए राजी करना है। हालांकि, युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर ईरान ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
अमेरिका ने क्रिप्टो करंसी को फ्रीज किया
कूपर ने जानकारी दी कि पिछले कुछ हफ्तों में CENTCOM और अमेरिकी वित्त मंत्रालय की संयुक्त कार्रवाई में ईरान की 350 मिलियन डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी को फ्रीज किया गया है। उन्होंने दोहराया कि नौसैनिक नाकेबंदी की वजह से तेहरान को कच्चे तेल की बिक्री से 25 बिलियन डॉलर के राजस्व का नुकसान हुआ है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव
कूपर के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर ईरान द्वारा किए जा रहे हमलों में हाल में जो तेजी देखी गई है, वह IRGC की बढ़ती बौखलाहट का संकेत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन हमलों के बावजूद यह अहम समुद्री मार्ग अभी भी खुला है और परिचालन में है। पिछले एक सप्ताह के दौरान ही इस जलमार्ग से 400 से अधिक जहाज गुजरे हैं और करीब 100 मिलियन बैरल तेल का परिवहन हुआ है।अमेरिकी सेना ने हाल के हफ्तों में इस जलमार्ग के पास तैनात ईरान की एंटी-शिप मिसाइलों और अटैक ड्रोन लॉन्चर्स पर जवाबी कार्रवाई काफी हद तक रोक दी है।
चुनाव से पहले हमले रोके
एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, व्हाइट हाउस ने नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले हालात को और बिगड़ने से बचाने के लिए इन हमलों को रोकने का निर्देश दिया था।अमेरिकी अधिकारियों को आशंका है कि लगातार हो रहे हमलों के कारण शिपिंग कंपनियां इस रूट से परहेज करने लगेंगी। इससे तेल की सप्लाई में कमी आ सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ सकती हैं। उनका मानना है कि ईरान तेल की कीमतों में उछाल लाकर चुनाव से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है।
युद्ध विराम पर कतर के जवाब का इंतजार कर रहे
इस बीच, व्हाइट हाउस और कतर के मध्यस्थ वाशिंगटन के युद्ध-विराम प्रस्ताव पर तेहरान के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि तेहरान में अभी भी इस प्रस्ताव पर मंथन जारी है।क्षेत्रीय मध्यस्थों ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से अपील की है कि वे अपना जवाब मध्यावधि चुनावों के बाद तक टालने से बचें। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि चुनाव के बाद ट्रंप का रुख ईरान के प्रति नरम पड़ेगा।




















