भारत में US DLA की तर्ज पर बनेगा इंटीग्रेटेड डिफेंस लॉजिस्टिक्स ढांचा, तीनों सेनाओं को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली। भारतीय सेनाओं के रक्षा लॉजिस्टिक्स तंत्र को एकजुट करने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा सुधार करने जा रही है। सरकार अमेरिका के मॉडल पर आधारित एक इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स फ्रेमवर्क विकसित कर रही है। इसका उद्देश्य युद्ध और संघर्ष जैसी परिस्थितियों में थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। यह पहल प्रस्तावित थिएटर कमांड व्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स (DMA) को सौंपी गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सुझाव दिया था
इस संबंध में DMA में संयुक्त सचिव (नौसेना और रक्षा स्टाफ) रियर एडमिरल कुणाल सिंह राजकुमार ने राज्यसभा सांसद डॉ. अजीत माधवराव गोपचाडे को पत्र लिखकर जानकारी दी है।दरअसल, सांसद गोपचाडे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सुझाव दिया था कि अमेरिका की डिफेंस लॉजिस्टिक्स एजेंसी (US DLA) के समान भारत में भी एक एकीकृत रक्षा लॉजिस्टिक्स और ईंधन प्रबंधन प्रणाली विकसित की जानी चाहिए। अपने सुझाव में सांसद ने अमेरिकी DLA की कार्यप्रणाली का उदाहरण दिया था। अमेरिकी DLA अमेरिकी रक्षा विभाग के लिए एक सेंट्रल कॉम्बैट लॉजिस्टिक्स सपोर्ट एजेंसी के रूप में कार्य करती है। यह एक ही छत के नीचे ईंधन आपूर्ति, सैन्य खरीद, स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता, लॉजिस्टिक्स AI सिस्टम, रक्षा मानकीकरण, पेट्रोलियम गुणवत्ता जांच, वेयरहाउसिंग, तकनीकी मदद और वैश्विक सप्लाई-चेन मैनेजमेंट जैसे कार्यों को संभालती है।उन्होंने प्रधानमंत्री को यह भी अवगत कराया था कि फिलहाल भारत में लॉजिस्टिक्स प्रबंधन कई अलग-अलग विभागों में विभाजित है। इसमें आर्मी सर्विस कोर, आर्मी ऑर्डनेंस कोर, EME, नौसेना की लॉजिस्टिक्स विंग, वायु सेना के मेंटेनेंस सिस्टम, फ्यूल डिपो और खरीद-इन्वेंट्री से जुड़ी अन्य एजेंसियां शामिल हैं, जिन्हें एकीकृत करने की जरूरत है।
वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को शामिल किया जा रहा है
गोपचाडे के अनुसार, DMA ने उन्हें अवगत कराया है कि प्रस्तावित थिएटर कमांड्स को प्रभावी समर्थन देने के लिए बनाई जा रही एकीकृत लॉजिस्टिक्स संरचना में भारत के लिए उपयोगी सभी वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को शामिल किया जा रहा है। इस प्रस्ताव को ठोस रूप देने के लिए सेनाओं के बीच लॉजिस्टिक्स से जुड़ी प्रक्रियाओं और तौर-तरीकों को एक साथ लाने हेतु विभिन्न स्तरों पर कई संयुक्त समितियों और समूहों का गठन किया गया है। इनमें जॉइंट ऑपरेशनल लॉजिस्टिक्स कमेटी (JOLC), जॉइंट सर्विस स्टडी ग्रुप्स (JSSGs), जॉइंट वर्किंग ग्रुप्स (JWGs) और इंटर-सर्विस मेंटेनेंस वर्किंग ग्रुप्स (IMWGs) शामिल हैं।
तीनों सेनाओं के लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट एप्लिकेशन पर काम चल रहा
सांसद गोपचाडे ने कहा कि DMA ने जानकारी दी है कि रियल-टाइम में तीनों सेनाओं के बीच इन्वेंट्री की उपलब्धता दिखाने और सर्विस-स्पेसिफिक एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ERP) सॉफ्टवेयर को एकीकृत करने के लिए एक त्रि-सेवा लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट एप्लिकेशन पर काम चल रहा है। पत्र में यह भी बताया गया है कि नेशनल डिफेंस कोडिफिकेशन सिस्टम पर कार्य प्रगति पर है और पूरे देश में जॉइंट लॉजिस्टिक्स नोड तथा इसके बाद जॉइंट एम्युनिशन डिपो, एयर स्टोर्स सप्लाई पार्क और मैटेरियल ऑर्गनाइजेशन स्थापित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
रक्षा क्षेत्र के लिए एक जॉइंट लॉजिस्टिक्स इंटरफेस उपलब्ध कराएंगे
राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति और इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स इंटरफेस प्लेटफॉर्म (ULIP) की तर्ज पर प्रधानमंत्री गति शक्ति डिफेंस पोर्टल भी तैयार किया जा रहा है। इसका मकसद तीनों सेनाओं और सीमावर्ती इलाकों में रक्षा क्षेत्र के लिए एक जॉइंट लॉजिस्टिक्स इंटरफेस उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही लॉजिस्टिक्स को अधिक कुशल बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी आधुनिक तकनीकों को भी जोड़ा जा रहा है। DMA ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी डिफेंस ट्रांसपोर्ट एजेंसी (DLA) जैसी संयुक्त लॉजिस्टिक्स एकीकरण प्रणाली देश की रणनीतिक जरूरत है। इसे लागू करना रक्षा मंत्रालय की टॉप प्रायोरिटी में शामिल है।प्रधानमंत्री को भेजे गए अपने पत्र में सांसद गोपचाडे ने कई अहम सुधारों का प्रस्ताव रखा था। इनमें एक इंटीग्रेटेड डिफेंस फ्यूल मैनेजमेंट सिस्टम बनाना, एक सुरक्षित मिलिट्री फ्यूल कार्ड सिस्टम शुरू करना, AI-आधारित प्रेडिक्टिव लॉजिस्टिक्स और मेंटेनेंस को लागू करना।इसके साथ ही एक एकीकृत पेट्रोलियम क्वालिटी एश्योरेंस नेटवर्क तैयार करना शामिल है।




















