ईरान ने आसिम मुनीर को दिया बड़ा झटका! अमेरिका से बातचीत पर रखीं कड़ी शर्तें, यूरेनियम पर भी दोटूक जवाब

काहिरा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ईरान और अमेरिका के बीच समझौता कराने की कोशिश में तेहरान पहुंचे हैं। उनके साथ पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी भी मौजूद हैं। इस दौरे के दौरान ईरानी नेताओं ने अपनी मांगों को लेकर सख्त रुख दिखाया। ईरान का कहना है कि जब तक उसकी शर्तों पर अमल नहीं होता, तब तक अमेरिका के साथ बातचीत आगे बढ़ाना मुश्किल है। परमाणु सामग्री को लेकर भी तेहरान ने अपना रुख स्पष्ट किया है।
ईरान ने साफ किया अपना रुख, पहले मांगें फिर बातचीत
ईरानी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान ने पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल को बताया कि अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करने से पहले उसकी मांगों पर कार्रवाई जरूरी है। ईरान का कहना है कि केवल बातचीत की पेशकश से भरोसा बहाल नहीं होगा। इसके लिए अमेरिका को अपने फैसलों में बदलाव करना होगा। इस रुख से साफ है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता के बावजूद दोनों देशों के बीच तनाव कम करने का रास्ता आसान नहीं है।
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होर्मुज स्ट्रेट को लेकर सात शर्तों पर जोर
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा है कि अमेरिका को ईरान का भरोसा जीतने के लिए उसकी मांगों पर ध्यान देना होगा। रिपोर्टों के मुताबिक, इन मांगों में होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े विवाद को सुलझाना भी शामिल है। ईरान चाहता है कि उसके बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकाबंदी खत्म हो, तेल के निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं और क्षेत्र में जारी दुश्मनी रोकी जाए। इन शर्तों पर सहमति के बिना समझौते की संभावना कमजोर बनी हुई है।
यूरेनियम पर ईरान का कड़ा संदेश
परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी ईरान ने अपना रुख सख्त रखा है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, देश में मौजूद संवर्धित यूरेनियम को विदेश भेजने का सवाल नहीं उठता। तेहरान का यह बयान ऐसे समय आया है, जब परमाणु सामग्री का मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच विवाद की बड़ी वजह बना हुआ है। हालांकि, यूरेनियम को लेकर किसी संभावित समझौते की गुंजाइश पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता पर क्यों उठ रहे सवाल?
आसिम मुनीर का दौरा ऐसे समय हुआ है, जब पाकिस्तान दोनों देशों के बीच तनाव कम कराने की कोशिश कर रहा है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने मुनीर से मुलाकात को लेकर अनिच्छा दिखाई और पाकिस्तान की भूमिका पर संदेह जताया। हालांकि, मुलाकात से इनकार किए जाने संबंधी इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पाकिस्तान की मध्यस्थता कितनी सफल होगी, यह आने वाले दिनों में साफ हो सकता है।
तेल की कीमतों पर भी पड़ रहा असर
अमेरिका-ईरान संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। इस समुद्री रास्ते से दुनिया के कई देशों तक तेल पहुंचता है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से तेल आयात करने वाले देशों पर दबाव बढ़ता है। पाकिस्तान जैसे देशों के लिए यह स्थिति खास तौर पर मुश्किल पैदा कर सकती है।




















