
इंदौर। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को विजयादशमी के मौके पर इंदौर में शस्त्र पूजन करने के साथ ही घोषणा की कि पुलिस की एक वाहिनी पूर्व होलकर राजवंश की शासक देवी अहिल्याबाई के नाम से जानी जाएगी। मुख्यमंत्री ने देवी अहिल्याबाई की 300वीं जयंती के उपलक्ष्य में यह घोषणा की। यादव ने शहर की पुलिस लाइन में महाकाली की बड़ी तस्वीर के आस-पास सुसज्जित शस्त्रों का पुरोहितों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन किया। इस मौके पर सूबे के पुलिस महानिदेशक सुधीर कुमार सक्सेना भी मौजूद थे।
शस्त्र और शास्त्र लेकर किया शासन
मुख्यमंत्री ने देवी अहिल्याबाई को उनके सुशासन, कूटनीति और देश भर के 150 से ज्यादा हिंदू तीर्थस्थलों पर कराए गए निर्माण कार्यों के लिए याद किया। सीएम शस्त्र पूजन के बाद एक भव्य समारोह में कहा,‘‘देवी अहिल्याबाई ने एक हाथ में शस्त्र और दूसरे हाथ में शास्त्र लेकर शासन किया। हमने फैसला किया है कि इंदौर में पुलिस की एक वाहिनी देवी अहिल्याबाई के नाम से जानी जाएगी।” मुख्यमंत्री ने कहा कि देवी अहिल्याबाई से प्रेरणा लेते हुए राज्य भर में कौशल विकास केंद्र खोले जाएंगे ताकि निवेशकों को दक्ष मानव संसाधन मुहैया कराया जा सके।
उन्होंने पड़ोसी महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले का नाम बदलकर अहिल्या नगर किए जाने के फैसले का स्वागत भी किया और कहा कि महाराष्ट्र सरकार का यह कदम प्रशंसनीय है। अहिल्याबाई का जन्म इस जिले के चौंडी गांव में हुआ था।
भव्य राम मंदिर बना
सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से निर्वाद रूप से फैसला लिया गया और भव्य राम मंदिर बना। सुप्रीम कोर्ट ने शाह बानो केस पर फैसला दिया, लेकिन लोकसभा में उस समय दम नहीं था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बढ़ा पाएं और यहीं कारण वो फैसला बदल गया। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समय राम मंदिर पर फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया।
अहिल्याबाई के नाम से युवाओं को देंगे ट्रेनिंग
सीएम ने कहा कि प्रदेश के हर संभाग में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन हो रहा है। हम उद्योगपतियों को मध्यप्रदेश में इंडस्ट्रीज लगाने के लिए बुलावा दे रहे हैं, साथ ही लोकमाता अहिल्याबाई के नाम से युवाओं को भी ट्रेनिंग देने की शुरुआत करने जा रहे हैं।