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शहर के ‘धार्मिक’ होने के आधार पर स्लॉटर हाउस की अनुमति न देना अस्वीकार्य, केवल 100 मीटर का दायरा माना जाएगा पवित्र : एमपी हाई कोर्ट

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शहर के ‘धार्मिक’ होने के आधार पर स्लॉटर हाउस की अनुमति न देना अस्वीकार्य, केवल 100 मीटर का दायरा माना जाएगा पवित्र : एमपी हाई कोर्ट
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने घोषणा की है की शहर के धार्मिक होने के आधार पर वहां स्लॉटर हाउस बनाने की अनुमति न देना अस्वीकार्य है। 17 दिसंबर को जस्टिस प्रणय वर्मा की बेंच ने कहा कि मंदसौर शहर में 100 मीटर के दायरे को पवित्र क्षेत्र घोषित करने का मतलब ये नहीं की पूरे शहर को पवित्र माना जाए। ऐसे में केवल 100 मीटर के दायरे को ही पवित्र माना जाता है। 

केवल 100 मीटर का दायरा पवित्र 

अदालत ने कहा, ‘यह कारण दिया गया है कि मंदसौर एक धार्मिक शहर है, इसलिए वहां स्लॉटर हाउस (कसाईखाना) स्थापित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, वह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। यह मामला विशेष कानूनी प्रावधानों से संचालित होता है। राज्य सरकार द्वारा 9 दिसंबर 2011 को जारी की गई अधिसूचना में केवल 100 मीटर के दायरे को ही पवित्र क्षेत्र घोषित किया गया है।’  आगे अदालत ने कहा कि, ‘संबंधित स्लॉटर हाउस में जानवरों का वध करने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन यह केवल अधिनियमों और अन्य लागू कानूनों के तहत सहमति मिलने पर ही संभव होगा।’

नगर निगम ने आवेदन किया था खारिज 

इस मामले में साबिर हुसैन ने नगर निगम को आवेदन किया था, जिसे खारिज कर दिया गया। नगर निगम ने कहा कि मंदसौर एक धार्मिक शहर है और स्लॉटर हाउस की अनुमति देने से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है।  उन्होंने यह कह कर मामले को टाल दिया कि, ‘स्लॉटर हाउस के लिए उपयुक्त स्थान की पहचान की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा, सिटी पुलिस अधीक्षक और सिटी कोतवाली के प्रभारी अधिकारी ने भी स्लॉटर हाउस के लिए अनुमति न देने का अनुरोध किया है’

याचिकाकर्ता ने दी अधिकारी के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती

आवेदन खारिज होने के बाद याचिकाकर्ता ने नगर परिषद और मंदसौर के मुख्य नगरपालिका अधिकारी को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि 2011 की राज्य सरकार की अधिसूचना में केवल 100 मीटर के दायरे को ‘पवित्र’ क्षेत्र घोषित किया गया है, इसलिए इस दायरे के बाहर स्लॉटर हाउस की अनुमति दी जा सकती है।

हाई कोर्ट का नगर निगम को आदेश  

नगर निगम को एनओसी जारी करने का आदेश देते हुए अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974, वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 और अन्य लागू कानूनों के तहत सहमति लेने के बाद स्लॉटर हाउस स्थापित करने की अनुमति दी जाएगी।  ये भी पढ़ें- हरियाणा में 20 बच्चों पर गिरी ईंट की दीवार, हादसे में 3 महीने की बच्ची समेत 4 की मौत
Akriti Tiwary
By Akriti Tiwary

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