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भारत-चीन सीमा समझौते के बाद पूर्वी लद्दाख से पीछे हटने लगीं सेनाएं, तंबू और कई टेंपरेरी स्ट्रक्चर उखाड़े

नई दिल्ली। हाल ही में भारत और चीन के बीच हुए नए सीमा समझौते के बाद शुक्रवार से दोनों देशों की सेनाओं ने पूर्वी लद्दाख सीमा से पीछे हटना शुरू कर दिया है। समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, डेमचोक और देपसांग पॉइंट से दोनों देशों ने अपने अस्थायी टेंट और शेड हटाना शुरू कर दिया है। मिलिट्री उपकरण और गाड़ियां भी पीछे ले जाई जा रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, 28 और 29 अक्टूबर तक दोनों देश देपसांग और डेमचोक से अपनी-अपनी सेनाएं पूरी तरह हटा लेंगे।

पेट्रोलिंग समझौते की शर्तें

गलवान जैसी झड़प टालने के लिए दोनों देश की सेनाएं अलग-अलग दिन पेट्रोलिंग करेंगी और पेट्रोलिंग से पहले एक-दूसरे को सूचित करेंगे। हालांकि, पेट्रोलिंग के लिए सीमित सैनिकों की संख्या तय की गई। सैनिकों के संख्या को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है। भारत-चीन के बीच सीमा समझौता दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा संघंर्ष से उपजे तनाव को कम करने के लिए किया गया है, जो 2020 में गलवान घाटी की झड़प के बाद से बना हुआ था। भारतीय सेना के मुताबिक, सैनिक अब देपसांग के पेट्रोलिंग पॉइंट 10, 11, 11-A, 12 और 13 तक जा सकेंगे।

गलवान और गोगरा हॉट स्प्रिंग्स पर फैसला बाकी

डेमचोक और देपसांग क्षेत्र में पेट्रोलिंग को लेकर सहमति बन गई है, लेकिन गलवान घाटी और गोगरा हॉट स्प्रिंग्स जैसे विवादित क्षेत्रों पर अभी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी की ब्रिक्स यात्रा के बाद समझौता

यह समझौता 21 अक्टूबर को ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद फाइनल हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में शांति बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया था।

LAC पर 2020 की स्थिति बहाल होगी

भारत और चीन इस बात पर सहमत हुए हैं कि अप्रैल 2020 से पहले की स्थिति को बहाल किया जाएगा। यानी चीन की सेना उन क्षेत्रों से पीछे हटेगी, जहां उसने अतिक्रमण किया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विक्रम मिस्री ने बताया कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को हल करने और पेट्रोलिंग के नियमों को लेकर एक प्रस्ताव तैयार हुआ है, जिस पर दोनों पक्ष काम करेंगे।

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