
अशोक गौतम-भोपाल। नगरीय निकायों ने जलकर, स्वच्छता कर सहित अन्य करों के साथ साथ प्रापर्टी टैक्स की वसूली तेज कर दी गई है। इसके लिए अगले माह से वसूली अभियान भी चलाए जाएंगे। इसमें उन क्षेत्रों को विशेष तौर पर फोकस किया गया है, जहां सालों से बकायादारों ने वर्षों से टैक्स जमा नहीं किया है।
400 से अधिक निकायों में अब तक 1500 करोड़ रुपए से अधिक वसूली की जा चुकी है। वसूली के मामले में इंदौर नगर निगम सबसे आगे हैं, भोपाल नगर निगम दूसरे नंबर पर है। पिछले वर्ष अब तक 1 हजार करोड़ रुपए वसूली हुई थी। इसका कारण है कि इस साल ज्यादा वसूली करने पर मोहन सरकार ने निकायों को विशेष प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की है।
पुरस्कार में ये मिलेगा
करों व शुल्कों के माध्यम से स्वयं की आय में अपने संभाग में सबसे अधिक वृद्धि करने वाली नगर पालिका को 5 करोड़ रुपए और नगर परिषद को 2 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष प्रोत्साहन के रूप में दिए जाएंगे।
शासकीय और निजी कार्यालयों की स्क्रूटनी
वसूली में सरकार के बड़े-बड़े कार्यालयों, निजी कंपनियों के भवन और कार्यालयों को स्क्रूटनी की गई है। इनमें उन भवनों और कार्यालयों को प्राथमिक सूची में रखा गया है, जिनमें लाखों, करोड़ों रुपए बकाया है। इन कार्यालयों के प्रमुखों के पास अधिकारी खुद उनसे टैक्स जमा करने के लिए बातचीत कर रहे हैं।
नियुक्तियों से बिगड़ रही निकायों की हालत
निकायों में सबसे बड़ी समस्या अनियमित नियुक्ति की है। निकाय के चुने हुए जनप्रतिनिधि सबसे पहले अपने चहेतों की निकायों में अनियोजित नियुक्तियां करते हैं। इससे आर्थिक बोझ बढ़ता है और निकायों की माली हालत प्रभावित होती है। एक बार नियुक्ति मिलने के बाद इन कर्मियों को हटाना मुश्किल हो जाता है।
100 प्रतिशत वसूली पर जोर देना होगा
निकायों को सौ प्रतिशत वसूली पर जोर देना होगा। इसके साथ ही उन्हें अपने आय के स्रोत भी बढ़ाने होंगे। इससे निकायों का क्रेडिट स्कोर बढ़ेगा। सीएम डॉ. मोहन यादव ने इस वर्ष निकायों की वसूली पर पुरस्कार देने की घोषणा भी की है। – भरत यादव, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग