IIIT भोपाल के 2 वैज्ञानिक दुनिया के टॉप 2% शोधकर्ताओं की सूची में शामिल, 425 से ज्यादा शोधपत्रों का योगदान

भोपाल। यह सूची स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं और एल्सेवियर के सहयोग से तैयार की जाती है, जिसमें एच-इंडेक्स और वैज्ञानिक योगदान जैसे संकेतकों के आधार पर शोध प्रभाव का आकलन किया जाता है। प्रो. आशुतोष कुमार सिंह लगातार पांच वर्षों से अधिक समय से इस सूची में शामिल हैं, जबकि डॉ. रजनीश चौरसिया को 2026 की एकल-वर्षीय शोध प्रभाव श्रेणी में स्थान मिला है। दोनों शोधकर्ता क्लाउड कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग, नैनोइलेक्ट्रॉनिक्स और आधुनिक तकनीकों से जुड़े क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।
स्टैनफोर्ड और एल्सेवियर के सहयोग से तैयार होती है सूची
दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की यह सूची स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं और एल्सेवियर के सहयोग से तैयार की जाती है। इसमें शोधपत्रों को मिले एच-इंडेक्स और वैज्ञानिक योगदान जैसे विभिन्न संकेतकों के आधार पर शोधकर्ताओं के प्रभाव का आकलन किया जाता है। इस सूची में स्थान मिलना शोध के क्षेत्र में वैज्ञानिकों के योगदान और उनके काम के प्रभाव को दर्शाता है।
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क्लाउड कंप्यूटिंग और मशीन लर्निंग में प्रो. आशुतोष का शोध
प्रो. आशुतोष कुमार सिंह का शोध क्लाउड कंप्यूटिंग, बिग डेटा एनालिटिक्स, मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी और वेब टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है। वे क्लाउड में डेटा सुरक्षा, पूर्वानुमान आधारित डेटा विश्लेषण और डिजिटल सर्किट की विश्वसनीयता बढ़ाने वाली तकनीकों पर काम कर रहे हैं, जबकि उनका शोध न्यूरल नेटवर्क आधारित वेब स्पैम पहचान से भी जुड़ा है।

425 से अधिक शोध प्रकाशन, 12 पुस्तकें और दो पेटेंट
प्रो. आशुतोष कुमार सिंह के नाम 425 से अधिक शोध प्रकाशन, 12 पुस्तकें और दो पेटेंट दर्ज हैं। लगातार पांच वर्षों से अधिक समय तक प्रतिष्ठित सूची में शामिल रहना उनके शोध कार्यों के प्रभाव को दर्शाता है। उनके शोध क्षेत्र आधुनिक डिजिटल तकनीकों, डेटा सुरक्षा और कंप्यूटिंग सिस्टम की विश्वसनीयता बढ़ाने से जुड़े हैं।
नैनोइलेक्ट्रॉनिक्स और न्यूरोमॉर्फिक कंप्यूटिंग पर डॉ. चौरसिया का काम
डॉ. रजनीश चौरसिया का शोध सेमीकंडक्टर मैटेरियल्स एंड डिवाइसेस, टू-डायमेंशनल मैटेरियल्स, नैनोइलेक्ट्रॉनिक्स और मेम्रिस्टर आधारित उपकरणों पर केंद्रित है। वे जैनस ट्रांजिशन मेटल डाइकैल्कोजेनाइड्स के इलेक्ट्रॉनिक गुणों और गैस सेंसिंग क्षमता का अध्ययन कर रहे हैं। उनका काम न्यूरोमॉर्फिक कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल सिनैप्स और उन्नत गैस सेंसर तकनीक से भी जुड़ा है, जिनसे कम ऊर्जा खपत वाले उपकरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित हार्डवेयर और स्मार्ट सेंसर विकसित करने की संभावनाएं हैं।




















