
भारतीय रिजर्व बैंक में लगाताक बढ़ती महंगाई को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट को 4% बढ़ाकर 4.40% कर दिया है। यानी अब होम-ऑटो और पर्सनल लोन महंगे हो जाएंगे। रिजर्व बैंक के इस ऐलान से लोगों के ऊपर ईएमआई (EMI) का बोझ बढ़ना तय हो गया है। RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये जानकारी दी।
अचानक हुई आरबीआई एमपीसी की बैठक
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बुधवार को अचानक प्रेस कांफ्रेस की। गवर्नर दास ने कांफ्रेंस में बताया कि रेपो रेट को 0.40 फीसदी बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इस बैठक में एमपीसी के सदस्यों ने एकमत से रेपो रेट को 0.40 फीसदी बढ़ाने का फैसला लिया। एमपीसी ने यह फैसला बेकाबू होती महंगाई के कारण लिया।
नहीं मिलेगी महंगाई से राहत, RBI को ये डर
चालू वित्त वर्ष में महंगाई का प्रेशर बने रहने की आशंका है। RBI के मुताबिक वित्त वर्ष 2022-23 में महंगाई दर 5.7 फीसदी पर रहने का अनुमान है। शक्तिकांत दास ने पिछले महीने बताया था कि महंगाई की दर पहली तिमाही में 6.3%, दूसरी तिमाही में 5%, तीसरी तिमाही में 5.4% और चौथी तिमाही में 5.1% रह सकती है।
6-8 जून की मौद्रिक नीति से पहले बढ़ाई गईं दरें
आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा यानी एमपीसी की बैठक 6-8 जून को होनी थी पर इससे पहले ही ग्लोबल स्थितियों को देखते हुए आरबीआई ने आज रेपो रेट में 0.40 फीसदी का इजाफा कर दिया है। पिछली बार 22 मई 2020 को रेपो रेट में बदलाव हुआ था। तब से ये 4% के ऐतिहासिक लो लेवल पर बना हुआ था। मॉनेटरी पॉलिसी की मीटिंग हर दो महीने में होती है। पिछली मीटिंग 6-8 अप्रैल को हुई थी।
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क्या होता है रेपो व रिवर्स रेपो रेट?
रेपो रेट वह रेट होता है जिस पर RBI से बैंकों को कर्ज मिलता है, जबकि रिवर्स रेपो रेट वह दर होती है जिस दर पर बैंकों को RBI के पास अपना पैसा रखने पर ब्याज मिलता है।
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