
होलिका दहन हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे फाल्गुन पूर्णिमा की रात को मनाया जाता है। इस दिन असुर हिरण्यकशिपु की बहन होलिका के जलने और भक्त प्रह्लाद के बचने की कथा का स्मरण किया जाता है। इस बार छोटी होली (होलिका दहन) के दिन पूरे समय भद्रा काल रहेगा। भद्रा रात 11:26 बजे समाप्त होगी, जिसके बाद ही होलिका दहन किया जा सकेगा।
होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
- होलिका दहन मुहूर्त – 11:26 PM से 12:30 AM, 14 मार्च
- अवधि – 01 घण्टा 04 मिनट
- भद्रा पूंछ – 06:57 PM से 08:14 PM
- भद्रा मुख – 08:14 PM से 10:22 PM
प्रदोष के दौरान होलिका दहन भद्रा के साथ
- पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – 13 मार्च, 2025 को 10:35 AM बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्त – 14 मार्च, 2025 को 12:23 PM बजे
होलिका दहन की पौराणिक कथा
पुराणों के अनुसार, हिरण्यकशिपु नामक राक्षस राजा अमर होने की इच्छा रखता था। उसने भगवान ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया कि वह किसी इंसान, जानवर, देवता या असुर के हाथों नहीं मरेगा। दिन या रात, घर के अंदर या बाहर, किसी भी हथियार से उसका वध नहीं होगा। वह अजेय रहेगा और संपूर्ण सृष्टि पर शासन करेगा।
हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। उसने अपने पिता को पूजने से इनकार कर दिया, जिससे हिरण्यकशिपु क्रोधित हो गया। उसने प्रह्लाद को मारने के कई प्रयास किए, लेकिन हर बार विष्णु भगवान ने उसकी रक्षा की।
होलिका के छल की हार
हिरण्यकशिपु की बहन होलिका के पास एक विशेष वस्त्र था, जिससे वह आग में भी नहीं जल सकती थी। उसने प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने का फैसला किया, ताकि प्रह्लाद जल जाए और वह सुरक्षित रहे। लेकिन जैसे ही प्रह्लाद ने भगवान विष्णु का जाप किया, वह वस्त्र उड़कर प्रह्लाद को ढक लिया और होलिका जलकर भस्म हो गई।
इसी घटना की याद में हर साल होलिका दहन किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
होलिका दहन का महत्व
- बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक।
- सकारात्मक ऊर्जा और नकारात्मकता का अंत।
- परंपरागत रूप से घर में सुख-समृद्धि की कामना।
- नई फसल के आगमन का संकेत।
कैसे मनाया जाता है होलिका दहन?
- लकड़ियों और उपलों से होलिका का विशाल ढांचा बनाया जाता है।
- इसे गाय के गोबर से बने उपलों, लकड़ी, सूखी घास और पवित्र सामग्री से सजाया जाता है।
- होलिका दहन से पहले पूजा की जाती है और नई फसल के अनाज को अग्नि में भूनकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
- होली के दिन रंगों और गुलाल से एक-दूसरे को शुभकामनाएं दी जाती हैं।
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