हे मां! ये तो कन्यापूजन के दिन हैं...मेरा ऐसा तिरस्कार क्यों?

भोपाल। देवी आराधना और कन्या स्वरूप के पूजने के दिनों में राजधानी के ऐशबाग इलाके में मां की ममता को झकझोर देने वाला मामला आया है। यहां पुल पातरा से बाग उमराव दूल्हा जाने वाले रास्ते पर एक घर के सामने किसी मां ने नवजात बच्ची को फेंक दिया। बच्ची पीले रंग की प्लास्टिक बोरी में लिपटी थी। आसपास के लोगों ने बच्ची की रोने की आवाज सुनकर पुलिस को सूचना दी।
पुलिस ने मासूम को कमला नेहरू अस्पताल पहुंचाया। वहां उसे पीडियाट्रिक एसएनसीयू में रखा गया है। उसका वजन 1.3 किलो है। जांच में सामने आया है कि बच्ची कुछ घंटे पहले पैदा हुई थी। इसका एक सीसीटीवी फुटेज सामने आया है जिसमें एक महिला एक्टिवा से थैली निकालती दिख रही है। महिला की पहचान झोला छाप डॉक्टर के रूप में हुई है।
ऑक्सीजन सपोर्ट पर बच्ची
गांधी मेडिकल कॉलेज के पीडियाट्रिक विभाग के मुताबिक बच्ची की स्थिति नाजुक है। बच्ची लो बर्थ वेट केटेगरी में आती है। बच्ची का जन्म संभवत: 32 सप्ताह में हुआ है। उसे ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है। बोरी में बंद रहने से पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिली जिसका असर उसके फेफड़ों पर भी पड़ा है।
प्रदेश में पालना योजना से कम हुए मामले : प्रदेश में पालना योजना के तहत अक्टूबर 2020 में यह पहल हुई थी और पूरे प्रदेश में 265 पालने लगाए गए थे। इसके बाद डेढ़ वर्ष में इन पालनों में 52 बच्चों को सुरक्षित छोड़ा गया (सेफ अबैन्डन्ड)। इनमें भोपाल के भी आठ नवजात शामिल थे।
फेंके गए नवजात शिशुओं की संख्या
2018 2019 2020 2021 2022 180 199 130 90 83 ( स्रोत : डायल 100, आंकड़े प्रदेशभर के)घटना स्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। इसमें दो जगह एक महिला आती-जाती दिखाई दे रही है, लेकिन स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि वही महिला बच्ची की मां है। - सुनील श्रीवास्तव, एसीपी, जहांगीराबाद





















